गुनाह के लिये ख़ुदा की सज़ा
1 पस ऐ इल्ज़ाम लगाने वाले तू कोई क्यूँ न हो तेरे पास कोई बहाना नहीं क्यूँकि जिस बात से तू दूसरे पर इल्ज़ाम लगाता है उसी का तू अपने आप को मुजरिम ठहराता है इसलिए कि तू जो इल्ज़ाम लगाता है ख़ुद वही काम करता है।
17 पस अगर तू यहूदी कहलाता और शरी’अत पर भरोसा और ख़ुदा पर फ़ख़्र करता है।
21 पस तू जो औरों को सिखाता है अपने आप को क्यूँ नहीं सिखाता? तू जो बताता है कि चोरी न करना तब तूख़ुद क्यूँ चोरी करता है? तू जो कहता है ज़िना न करना; तब तू क्यूँ ज़िना करता है?
23 तू जो शरी’अत पर फ़ख़्र करता है? शरी’अत की मुख़ालिफ़त से ख़ुदा की क्यूँ बे’इज़्ज़ती करता है?