21 मगर अब शरी’अत के बग़ैर ख़ुदा की एक रास्तबाज़ी ज़ाहिर हुई है जिसकी गवाही शरी’अत और नबियों से होती है। 22 यानी ख़ुदा की वो रास्तबाज़ी जो ईसा मसीह पर ईमान लाने से सब ईमान लानेवालों को हासिल होती है; क्यूँकि कुछ फ़र्क़ नहीं।
23 इसलिए कि सब ने गुनाह किया और ख़ुदा के जलाल से महरूम हैं। 24 मगर उसके फ़ज़ल की वजह से उस मख़लसी के वसीले से जो मसीह ईसा में है मुफ़्त रास्तबाज़ ठहराए जाते हैं।
28 चुनाँचे हम ये नतीजा निकालते हैं कि इंसान शरी’अत के आमाल के बग़ैर ईमान के ज़रिए से रास्तबाज़ ठहरता है।