परिवर्तित जीवन
1 येकोलायी जब कि मसीह न शरीर म होय क दु:ख उठायो त तुम भी उच मनसा ख अवजार को जसो धारन करो, कहालीकि जेन शरीर म दु:ख उठायो ऊ पाप सी छूट गयो, 2 अब सी आगु, तुम्हरो धरती पर को जीवन मानविय इच्छावों को अनुसार नहीं बल्की परमेश्वर की इच्छा को अनुसार जीवन जीये। 3 कहालीकि गैरयहूदी जो बाते हि करनो पसंद करत होतो ऊ बात की इच्छा को अनुसार, अऊर असभ्यता, वासना, पियक्कड़पन, लीलाक्रिडा, रंगरैली अऊर घृणित मूर्तिपूजा म जित तक हम न पहिले समय गवायो, उच बहुत भयो। 4 येको सी हि अचम्भा करय हंय कि तुम असो भारी घृणित, अऊर लापरवाही को जीवन जीन म शामिल नहीं होवय; येकोलायी हि तुम्हरी निन्दा करय हय। 5 पर जो मरयो हुयो अऊर जीन्दो को न्याय करन को लायी तैयार हय ऊ परमेश्वर ख ऊ खुद अपनो व्यवहार को लेखा-जोखा देयेंन।