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१ पतरस 4

परिवरिवन

1 जब ि मसशरु:उठउच मनसअवजजसरन करो, कहि शरु:उठगयो, 2 अब आगु, हरधरतपर वन नविइचों अननहीं बलपरमवर इचअनवन े। 3 कहि रयहि करनपसकरत इचअन, अऊर असभयता, सना, ियककडपन, िा, गरअऊर ििितक हम पहिसमय गवो, उच बहभयो। 4 ि अचमकरय ि असि, अऊर परववन िनहीं वय; ि हरिकरय हय5 पर मरयअऊर करन हय परमवर अपनयवहा-ें

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