1 येको बाद ऊ स्वर्गदूत न मोख जीवन देन वालो पानी की नदी दिखायी। वा नदी स्फटिक को जसी उज्वल होती। ऊ परमेश्वर अऊर मेम्ना को सिंहासन सी निकलत होती 2 ऊ नगर की सड़क को बीचो बीच सी बहत होती। नदी को यो पार अऊर ओन पार जीवन को झाड़ होतो; उन पर हर साल बारा बार फर लगत होतो हर महीना म एक बार, अऊर ऊ झाड़ियों को पाना सी राष्ट्रों को लोगों ख निरोगी करन लायी होतो।
3 अऊर नगर म कोयी भी परमेश्वर को श्राप म नहीं रहेंन, अऊर परमेश्वर को सिंहासन अऊर मेम्ना ऊ नगरी म रहेंन अऊर ओको सेवक ओकी सेवा करेंन। 4 हि ओको मुंह देखेंन, अऊर ओको नाम ओको हाथों पर लिख्यो हुयो होना। 5 फिर रात नहीं होयेंन, अऊर उन्ख दीया अऊर सूरज को प्रकाश की जरूरत नहीं होयेंन, कहालीकि प्रभु परमेश्वर उन्को प्रकाश होयेंन, अऊर ऊ राजा को जसो हमेशा हमेशा शासन करेंन।