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Eclesiastes 1

वन हय

1 यरशला, ऊद अऊर उपदशक वचन2 उपदशक वचन हय, "रच , रच ! सब कयहय" 3 सब हनत आदमधरत१:३ सूरज को खल्लो पर करय हय, ओख यदवय हय? 4 एक ़ी वय हय, अऊर सऱी आवय हय, पर धरतजसवसहमरहहय5 रज उदय वय हय, अऊर चलवय हय ििकलय हय6 हवदकितरफ बहय हय, अऊर उततर ितरफ मतवय हय; मतअऊर बहतरहहय, अऊर अपनपरिरमआवय हय7 सब नदिां एकच तरफ बहय हयि सब समदर िलय हय; पर िसमदर कभनहीं भरय8 सब थकवन आय; आदमवरनन नहीं कर सकय; खनसनवय , अऊर ननभरय 9 भयो, उच िें, अऊर बन हय उच िबनें; अऊर धरतपर नयनह10 असहय कहसकि नयहय? हमरपहिसमय आय रहहय11 ों नहीं रही, अऊर ों उनआन ों नहीं रहें

उपदशक अनभव

12 मय उपदशक यरशलइसएल ो। 13 मय अपनमन लगि धरतपर करयवय हय, ओकि करू; बड़ो ु:आय परमवर मनों ठहरहय ि ि ओकलगें14 मय उन सब ों धरतपर करयवय ; ो, ि सब अऊर हवपकडहय15 ़ो हय नहीं सकय, अऊर हयच नह, िनहीं सकय16 १:१६ १ राजा ४:२९-३१मय मन कहो, ", ितनयरशलपहिो, उन सब मय बहि िकरहय; अऊर बहि अऊर िगयहय" 17 मय अपनमन लगि ि अऊर गलपन अऊर खतपड़्ि हवपकडहय18 कहि बहि बहु:वय हय, अऊर अपनबढ़ावय हय अपनु:बढ़ावय हय

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