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सभोपदेशक 11

िआदमवभ

1 अपनऊपर े, कहि बहितय ओख िो। 2 बलआठ जनों े, कहि तय नहीं नय ि धरतपर िपति आय पड़ें3 यदि दर भरयहय, तब जमपर बरसें, अऊर दकितरफ िउततर तरफ, तब पर िें, वहांपड़्रहें4 कतरहेंवननहीं ें, अऊर दर खतरहेंफसल नहीं ें5 जसतय हवचलन रसनहीं नय अऊर कसतरह गरभवतबचबढ, वसतय परमवर नहीं नय सब करय हय6 पहअपन, अऊर अपनमत ; कहि तय नहीं नय ि सफल ें, , अचिकलें7 उजबहिवय हय, अऊर तपन खन पहुंचय हय8 यदि आदमबहतक रहे, ओख लगय हय ि अपनउमर सब वन आनने; पर रखि अनिकम नहीं ेंकयवय हय हय

जवों सल

9 जव,अपनजवआननकर, अऊर अपनजविों मगन रह; अपनमनमकर अऊर अपननजर जसचलपर रख ि इन सब ों परमवर करें10 अपनमन परअऊर शरु:कर, कहि लडकपन अऊर जव

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