बाड़ी को मजूरों को दृष्टान्त
1 "स्वर्ग को राज्य कोयी घर को मालिक को जसो हय, जो सबेरे निकल्यो कि अपनी अंगूर की बाड़ी म मजूरों ख काम म लगाये। 2 ओन हर एक मजूरों सी एक २०:२ रोमन सरकार को एक दीनार को मतलब हय एक दिन कि मजूरी दीनार रोज पर ठहरायो अऊर उन्ख अपनी अंगूर की बाड़ी म काम पर भेज्यो। 3 तब नव बजे निकल क ओन दूसरों कुछ लोगों ख बजार म बेकार खड़ो देख्यो, 4 अऊर ओन कह्यो, ‘तुम भी अंगूर की बाड़ी म जावो, अऊर जो कुछ ठीक हय, तुम्ख देऊं।’ 5 येकोलायी हि भी गयो, तब ओन दूसरों बार बारा बजे अऊर तीन बजे निकल क वसोच करयो। 6 दिन डुबन को पहिले ओन पाच बजे फिर निकल क दूसरों ख खड़ो पायो, अऊर ओन कह्यो, ‘तुम कहाली इत दिन भर बेकार म खड़ो रह्यो?’ 7 उन्न ओको सी कह्यो, ‘कोयी न हम्ख मजूरी पर नहीं लगायो।’ ओन ओको सी कह्यो, ‘तुम भी अंगूर की बाड़ी म जावो।’"
8 "शाम ख अंगूर की बाड़ी को मालिक न अपनो मुनीम सी कह्यो, ‘मजूरों ख बुलाय क पिछलो सी ले क पहिलो तक उन्ख मजूरी दे।’ 9 पाच बजे जो मजूर ख लगायो गयो होतो, त उन्ख भी एक एक दीनार मिल्यो। 10 जो पहिले आयो उन्न यो समझ्यो कि हम्ख जादा मिलेंन, पर उन्ख भी एक एक दीनारच मिल्यो। 11 जब मिल्यो त हि घर मालिक पर कुड़कुड़ाय क कहन लग्यो, 12 ‘इन पिछलो न एकच घंटा काम करयो, अऊर तय न उन्ख हमरो बराबर कर दियो, जिन्न दिन भर काम करयो अऊर तपन झेली?’"
13 ओन उन्म सी एक ख उत्तर दियो, "हे संगी, मय तोरो सी कुछ अन्याय नहीं करू। का तय नच मोरो सी एक दीनार मजूरी नहीं ठहरायो होतो? 14 जो तोरो हय, ओख ले अऊर चली जा; मोरी इच्छा यो हय कि जितनो तोख देऊं उतनोच यो पिछलो वालो ख भी देऊं। 15 का यो उचित नहाय कि जो मोरो हय ओको म सी जो चाहऊ ऊ करूं? का मोरो अच्छो होन को वजह तय बुरी नजर सी देखय हय?" 16 २०:१६ मत्ती १९:३०; मरकुस १०:३१; लूका १३:३०योच तरह सी "जो पीछू हंय, हि आगु होयेंन; अऊर जो आगु हंय हि पीछू होयेंन।"