28 जसो कि आदमी को बेटा; ऊ येकोलायी नहीं आयो कि ओकी सेवा टहल करी जाये, पर येकोलायी आयो कि खुद सेवा टहल करे, अऊर बहुत सो की छुड़ौती लायी अपनो जीव दे।"
28 जसो कि आदमी को बेटा; ऊ येकोलायी नहीं आयो कि ओकी सेवा टहल करी जाये, पर येकोलायी आयो कि खुद सेवा टहल करे, अऊर बहुत सो की छुड़ौती लायी अपनो जीव दे।"