जगत सी दोस्ती
1 का तुम्हरो बीच म लड़ाईयां अऊर झगड़ा कित सी आवय हय? का यो इच्छावों सी नहीं होवय हय? जो तुम्हरो अन्दर झगड़ा करतो रह्य हंय। 2 तुम चाहवय हय पर तुम्ख मिलय नहाय; येकोलायी तुम हत्या करय हय; तुम पूरो रीति सी इच्छा रखय हय, अऊर कुछ हासिल नहीं कर पावय; येकोलायी तुम झगड़य अऊर लड़य हय। तुम जो चाहवय हय ऊ मिलय नहाय कहालीकि तुम परमेश्वर सी मांगय नहाय।