11उही का समराज हमेसा हमेसा रहे। आमीन 5:11 आमीन
14प्रेम को चुमा से एक दुसरा ख नमस्कार कर।तुम सब ख, जो मसी म हो, सान्ति मिलती रह।
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11उही का समराज हमेसा हमेसा रहे। आमीन 5:11 आमीन
14प्रेम को चुमा से एक दुसरा ख नमस्कार कर।तुम सब ख, जो मसी म हो, सान्ति मिलती रह।
9प्रेम म कई कपट हो; पर बुराई से घृना कर; भलाई म लगो रह।
10भई म जसो प्रेम होवा हैं वसो ही एक दुसरा से प्रेम रख आपस म एक दुसरा आदर कर। अर एक दुसरा से चढ़ कर।
15आनन्द करन वालो का संग खुसी कर, अर रोन वालो का संग रोओ।
7काहेकि अरे भई, मो ख तोरो प्रेम से बेजा खुसी अर सान्ति मिला हैं, एकोलाने कि तोरो दुवारा सुध्द1:7 सुध्द अदमी हुन को मन हरो-भरो हो गयो हैं।
20अरे भई, या प्रेम मोखा प्रभु म तोरी तरफ से मिले। मसी म मोरो जीव का हरो भरो कर दे।
25हमरो प्रभु यीसु मसी कि किरपा तुमारी आत्मा पा होते रैय। आमीन।
5एको लाने तुम सब तरीका को कोसिस कर ख अपनो विस्वास पर सद्गुन, अर सद्गुन पर समझ,
6अर समझ पर सहन कि सक्ति, अर सहन कि सक्ति, अर धीरज पर भक्ति,
7अर भक्ति पर भई चारा कि इच्छा पर प्रेम बढ़ते जा।
14जे कुछ कर हैं, प्रेम से कर।
22अदि कोई प्रभु से प्रेम नी रखे ते उ नास होव। अर कोई प्रभु से प्रेम नी रखे ते उ सापित होए। अरे हमारो प्रभु, आ।
24यीसु मसी म मोरो प्रेम तुम सब ख संग रहे।
2उ अपनो मुंड़ो को चुम्मा से मो ख चूमे!काहेकि तोरो प्रेम अंगूर को रस से उत्तम है,
15तू सुन्दरी है, हे मोरी प्रिय, तू सुन्दरी है;तोरी आँखी हुन कबूतरी को जसी है।दुलन
16हे मोरो प्रेमी, तू सुन्दर अर मनभावनो है।अऊर हमरो बिछोना भी हरो घास हमरो होगो;
2दया अर सान्ति अर प्रेम तो ख बेजा जादा से प्राप्त होती रहे।
19यी वी हैं जे फुट डालह हैं; या सारीरिक अदमी हैं, जे म आत्मा नी।
25उ एक मातर परमेस्वर हमारो उध्दार करता की महिमा अर गऊरव अर पराक्रम अर अधिकार हमारो प्रभु यीसु मसी को दुवारा जसो सनातन काल से हैं, अब भी हो अऊर हमेसा रहे। आमीन।
11अर यू प्रभु कि तरफ से भयो;अर हमारी नजर म अदभुत हतो।"
30अर तू प्रभु अपनो परमेस्वर से अपनो पुरो मन से, अर अपनो पुरो सरीर से अर अपनी पुरी बुध्दी से अर अपनी पुरी सक्ती से प्रेम रखजे’
33अऊर ओसे पुरो मन, अर पुरी बुध्दी, अर पुरो सरीर अर पुरी सक्ती को संग म प्रेम रख जे अऊर पड़ोसी से अपनो जसो प्रेम रखजे; पुरी होमबली हुन अर बलिदान हुन से बढका हैं।"
2तुम पुरो तरीका से विनम्र, सैयम अर सहनसील बने, प्रेम से एक दुसरा ख सैय लेव
15हम प्रेम पुरक सही म चलते रैय, अऊर मसी म सब प्रकार की बढ़ोत्तरी करते जाय। मसी ही कलेसीया को सिर आय,
16अऊर जो से पुरो सरीर ख ताकत मिला हैं। तब सरीर अपनी हर एक जोड़ की मदत से एक संग मील ख अर एक संग गाँठ ख सभी जोड़ हुन कि मदत से अपनो सुधार होनो तक पहुँचा अऊर प्रेम से अपनो काम करा हैं।
3अदि म अपन पूरी सम्पत्ति दान कर दूँ। अऊर प्रसिध्द पान का लाने अपनो सरीर दे दे; कि यदि मो म प्रेम को अभाव हैं, ते ऐ से मोखा कुछ भी लाभ नी हैं।
4प्रेम सान्त रह हैं; अऊर दयालु रह हैं; प्रेम डाह नी करिये हैं: प्रेम अपनी बड़ाई नी करिये हैं अर घमण्ड नी करिये हैं,
8प्रेम कभी खत्म नी हैं; भविस्यव्दाणी हुन होए, ते खत्म हो जाहे।
8पर हम जो दिन का हैं, विस्वास अर प्रेम को कवच5:8 झिलम पहिन ख अर उध्दार की आसा को टोपा पहिन ख सतर ख 5:8 सावधानरहे।
13तुम प्रेम को संग उनकी खूब इज्जत करो, काहेकि वी तुमरो लाने मेहनत करा हैं। आपस म मिल जुल ख रहनो।
26सब भई बंद हुन ख प्रेम को सुध्द चुम्मा से सम्मान करनु।
3गोमर को पोरिया: असकनज, रीपत अऊर तोगर्मा थे।
22सेम को पोरिया एलाम, अस्सूर अर्पक्छद, लूद अऊर अराम हतो।
23अराम को पोरिया: ऊस हूल गेतर अऊर मस थो।
7अरे भई हुन, हम आपस म प्यार रख; काहेकि प्यार परमेस्वर से हैं। जो कुई प्रेम करिये हैं, उ परमेस्वर से भयो हैं अर परमेस्वर ख जान हैं।
16अऊर जो प्यार परमेस्वर हम से रखो आय, ओ ख हम जान गयो अर हमे ओको विस्वास आय।परमेस्वर प्रेम हैं, अर जो प्यार म बनो रवह हैं उ परमेस्वर म बनो रवह हैं, अर परमेस्वर ओ म बनो रवह हैं।
18प्यार म डर नी होव हैं, पर सच्चो प्यार डर ख दूर करा देवा हैं; काहेकि डर को सम्बन्ध दण्ड से होए हैं, अर जो डर करू हैं उ प्रेम म सच्चो नी भयो।
5पर जे कोई ओखा वचन पर चले, ओ म सच म परमेस्वर को प्रेम सच भयो हैं। यी से हम ख जान गया हैं
10जेय कोई अपनो भई अर बहिन से प्रेम रखह हैं, उ ही उजाला म रवह हैं, अऊर ठोकर नी खा सका हैं।
15तुम नी ते दुनिया से अर नी दुनिया म कि चीज हुन से प्रेम रख। अदि कोई दुनिया से प्यार रखह हैं, ते ओ म बाप को प्यार नी हैं।
1एकोलाने प्यारो पोरिया-पारी को जसो परमेस्वर को हिसाब से चलो,
2अऊर प्रेम म चलो जसो मसी न भी तुम से प्रेम करो, अऊर हमरो लाने अपनो तुम ख सुखदेन वालो सुगन्ध को लाने परमेस्वर को सामने भेंट कर ख बलिदान कर दियो।5:2 यूहन्ना 13:34; गलातियो 2:20
28असोच ही तरीका से जरूर हैं की अदमी अपनी अपनी ओरत से अपनो सरीर को समान प्रेम रखे। जो अपनी ओरत से प्रेम रखा हैं, उ अपनी तुम से प्रेम रखा हैं।
15अर सुध्द आत्मा भी हम ख यही गवाही देवह हैं, काहे की ओ न पहले कहयो रहा,
24हम ख या बात को ध्यान रखनो चाहिए कि हम कसो तरीका से प्रेम अर दुसरा हुन ख लाने एक दुसरा ख बड़ा सका हैं।
35एकोलाने तुम लोग अपनो भरोसा अऊर धैर्य छोडो ऐको पुरस्कार महान हैं।
6अदि मी इ बखत म अनाड़ी हूँ, तेबी ग्यान म नी। हम न ऐ ख हर बात म सब तरीका से तुमारो लाने परगट करियो हैं।
11कोके लाने? का एकोलाने कि मी तुम से प्रेम नी करू हैं? परमेस्वर यू जान हैं कि म तुम लोग हुन से कित्तो प्रेम करू हैं।
31प्रभु यीसु मसी को बाप अऊर परमेस्वर जो सदा धन्य हैं। उ जान हैं कि मी झूठो नी कह रयो हैं।
5आग्या को सारांस यू हैं कि सुध्द मन अर अच्छो विवेक, अर निस्कपट भरोसा से प्रेम उत्पन्न होए।
14अर हमारो प्रभु को दया उ भरोसा अर प्रेम को संग जे मसी यीसु म हैं, बहुतायत से भयो।
17अब हमेसा को राजा एकोमतलब का अविनासी, नी दिखन वालो, अकेलो मातर परमेस्वर को सम्मान अर बड़ाई सनातन होती रहे। आमीन।
8काहेकि असो अदमी दो मन को हैं। अर अपनी पुरी बात म चंचल आय।
12धन्य हैं उ जो मूसिबत म विस्वास लायक रहवा हैं दुख से खडो निकलनो पर ओ ख जिन्दगी को उ मुकुट हासिल होय जे ख प्रभु न अपनो दास हुन ख देवन को वादा करयो हैं। अपन प्यार करन वाला से की आय।
19अरे मोरा प्यारो भई हुन, या बात तुम जान लेनू; अर हर एक अदमी सुनन को लाने तत्पर अर बोलनो म धीर अर गुस्सा म धीमो हो,
12अर अधर्म को बड़नो से बेजा हुन को प्रेम ठण्डो पड़ जाएगो,
19उ दिन हुन म जो पेट से अर दूध पिलाव हैं। उन ख लाने धितकार, धितकार।
49अर अपनो दोस दास हुन ख मरन लगो, अर पीवन वालो को संग खाए-पीए।