4 मी तुम से जो मोरा दोस्त आय कहू हैं कि जो सरीर का चोट करत हैं पर ओको पिछे अर कुछ नी कर सकत, ओसे मत डर। 5 मी तुम ख जताऊ हैं कि तुमका कोसे डर नो चाहिए, घात करन का बाद जेका नरक म डालन को अधिकार हैं, ओ से ही डर; हाँ मी तो से कहूँ हैं, ओ से ही डरनू।
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