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Lucas 15

उदहरन

1 एक तब कर अर ओकआयकर हते। ि ओके। 2 पर फरअर सति़ा कहन लगिा, "िलत ैं अर उनकैं।" 3 पर उन उदहरन ो:

4 "ैं सव ो, अर ओमएक भटक , िनवगल कर, जब तक िओकजतरहे? 5 अर जब िैं, बड़ो पर उठकर ैं; 6 अर घर आकर तहअऊर पड़ोइकठकर कहत रह, आननकरो, ि िगई ैं।’ 7 कहैं ि असतरएक मन िवरइत, ितनि िनवअसधरा, िमन िआवसयकती।

िउदहरन

8 "अस, दस िो, अर ओमएक े, िजलअऊर घर ़-रकर, जब तक ििलग जत रहे? 9 अर जब िअपनसहलअर पड़ोिइकठकर कह ैं आननकरो? ि ििगयैं।’ 10 कहूँ ैं ि ि एक मन िवन िसय परमवर वरगदमनैं।"

िउदहरन

11 िकहयो, अदमिहते। 12 ओमिकहयो, , धन े। उन अपनधन िो। 13 िसब इकठकर चलगयो, अर वहाँ अपन धन-दऊलत उड़ा िो। 14 जब खतकर ो, सहर बड़ो अकपड़ो अऊर िगयो। 15 एकरहवएक उतगयो। अपनकर चरो। 16 अर हत हति उन फलकर हते, अऊर अपनभरे; अऊर हतो। 17 जब अपनमन आयकहन लगिो, िमजदिैं, अऊर यहाँ मर रयैं। 18 अब उठकर अपनअर ओसकहि िी, वरिअर नजर िैं। 19 अब यक रह, ि िकहलँ, अपनएक मजदसमरख े।

20 तब उठकर, अपननजचलगयो: अभहति ओखखकर तरस ो, अर दऊड गललगो, अर िो। 21 िओसकहयो, िी, वरिअर नजर िैं अर अब रह गयि िकहलँ। 22 परनिअपनकहयो, जलकपड़ा िलकर पहिा, अर ओकी, अऊर पहिो, 23 अर पलबचकर िि हम मन24 ि िमर गयहतो, ििगयैं गयहतो, अब िगयैं अऊर करन लगो।

25 "परनओकबड़ो िहतो। जब आतघर नजपहुँे, न-बजअर चन आविो। 26 अत: एक वक िो, रहैं?’ 27 ओसकहयो, भई आयैं, अर िपलबचकटवैं एकि भलैं।’ 28 कर भर गयअर तर े, पर ओकहर आय मनलगिो। 29 िउततर िो, इतनकर रयूँ’ अऊर कभआगी, कभएक बकरबचिि अपनकरूँ ैं।’ 30 पर जब िा, धन-दऊलत उडैं, अर आयो, ओकपलबचकटवो।’ 31 ओसकहयो, िा, सदैं; अर ैं सब ैं। 32 पर अब आननकरनअर मगन ि, ि भई मर गयहते, िगयैं; गयहतो, अब िगयैं’।"

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