1 हे मोरी प्रेम, तू सुन्दर है, तू सुन्दर है।
तोरी आँख हुन तोरो लट हुन को बीच म कबूतर हुन को जसो दिखाई देवा है।
तोरो बाल वह बकरी हुन को झुंड को जसो है
तुमरो बाल गिलाद पहाड़ को ढाल से नीचू उतर तब उछलती बकरी की तरह लहरावा है।
2 तोरो दाँत असो सफेद है जसी ऊन अभी अभी काटे हुओ
झुंड को जसो है, जे नहा ख उप्पर आयी हो,
वी हर एक दुसरा से मेल खावा।
अऊर ओ म से कोई संगी गायप नी है।
3 तोरा होट बेजा खुबसुरत लाल है,
अऊर तोरो मुंड़ो खुबसुरत है,
तोरा गाल तुमरे लट हुन को नीचू अनार की दो फाँक से दिखई पड़ह है।
4 तोरो गलो दाऊद को मीनार को जसो है,
जे अस्त्र-सस्त्र को लाने बना हो,
अऊर जे पर हजार ढाल हुन टंगी हुई होय, वी सभी ढाल हुन सूरवीर हुन की है।
5 तोरो दोई छाती हुन हिरन को दो जुड़वा पिल्ला हुन को जसो है,
जे सोसन फूल हुन को बीच म चरा है।
6 जब लक दिन ढ़लन नी लग जाय,
अऊर छाय लम्बी होते होते खतम नी हो जाय,
तब लक मी जल्दी से गन्धरस को पहाड़
अऊर लोबान की पहाड़ी प चलो जाऊंगो।
7 हे मोरी प्रेमी, तू सरवाग सुन्दरी है;
तोरो म कोई आरोप नी।
8 हे मोरी दुलन, तू मोरो संग लबानोन पर्वत से,
मोरो संग लबानोन से चली आ।
तू अमाना पहाड़ पर से नीचू चली आ,
सनीर पर्वत अर हेर्मोन पर्वत को चोटी प से, सिंह हुन को गुफा हुन से,
चीता हुन को पहाड़ हुन प से नजर कर।
9 हे मोरी अति प्रिय, हे मोरी दुलन,
तू न मोरो मन मोह लियो है,
तू न अपनो आँखी हुन को एक ही नजर से,
अऊर अपनो गलो हुन को एक ही हीरा हुन से मोरो मन चुरा लियो है,
10 हे मोरी बेजा प्यारी, हे मोरी दुलन,
तोरो प्रेम का ही मनोहर है!
तोरो प्रेम अंगूर को रस से का ही बडो है,
अर तोरो इतर हुन को सुगंध पुरा तरीका को मसाला हुन से जादा महकदार है!
11 हे मोरी दुलन, तोरो होठ हुन से सहद टपका है;
तोरी जीभ को नीचू सहद अर दूध रहवा है;
तोरो कपड़ा हुन को सुगंध लबानोन को जसो है।
12 ओ मोरी बेजा प्यारी, मोरी दुलन, एक लुकियो बगीचा है
एक दिवाल से घिरो बगीचा अऊर एक नीजी झरना है।
13 तोरो अंकुर बडो फलवाला अनार को बगीचा को जसो है।
जे म मेहदी अर जटामासी,
14 जटामासी अर केसर, लोबान को पुरा भाँति को झाड़,
मुस्क अर दालचीनी, गन्धरस, अगर, आदि पुरो खास खास सुगन्धित चिज होवा है।
15 तू बगीचा हुन को सोता आय,
फूटतो हुयो जल को कुआँ,
अर लबानोन पहाड़ से बहतो भयो धारा हुन है।
16 हे उत्तरी दिसा की हवा जग,
अर ओ दक्छिन हवा चली आ! मोरी बगीचा पर बहे,
जे वह सुगंध फेईलह है मोरी प्रेम अपनो बगीचा म आव,
अर वह बडो बडो फल खावा है।