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लूका 2

िअरपन

22 जब अनओकिभयो, यरसलगयि रभआगो, 23 जसि रभ(यवसा) िैं: "हर एक पहलिरभिो‍ ठहरगो।" 24 अर रभि अनईक "अर एक ़ा कबतर बच" कर ओकबलि चढ़ा ैं।

सम

25 यरसलसमएक अदमहतो, अर अदमधरअर भकहता; अर इसएल ि रसखत रह हतो, आतपर हती। 26 अर आतपर रगट भयहति जब तक रभमसो, तब तक ो। 27 आतिमनिआयो; अर जब य-बलक िआनदर ो, ि ओकििआनकरे, 28 ओखअपनिअर परमवर धनयवकर कहयो:

29 "ी, अब अपनअपनवचन (सब) अनि िकरैं,

30 ि उधिैं,

31 सब सहर आगिैं,

32 ि सररकिउजिा,

अर िइसएल महि"

33 ओखअर ओकओककहयवत हती, आसचरकरत हता। 34 समआसकर, ओकमरियम कहयो, ", इसएल जन िरन, अर उठअर एक आसिठहरगयैं, िएग35 अर मन तलवचलआर िएगऐसििरगट ो।"

हनगव

36 आसहनमक फनएल एक भवियवदकिहती। ़ी गई रह, अर वरतक अपनपति रह हती। 37 चऊरवरिधवहती: अर मनिहतपर उपअर थनकर कर त-दिकरत हती। 38 अर बखत आकपरमवर धनयवकरन लगिो, अर सभे, यरसलनगर टकरसखत रह हती, लक िकरन लगिो।

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