1 दारा नाम को मादी राजा को सासन काल को पहलो साल म ओ ख धीरज दिलावन अऊर तागत देवन को लाने मी ही खड़ो हो गयो।
2 अब मी दानिय्येल सच्ची बात बताऊँ है। देख, फारस को राज्य म अब तीन अऊर राजा उठेगो; अऊर चोऊथो राजा ऊ सभी से जादा धनी होएगो; अऊर जब ऊ धन को वजे से धनवान होएगो, तब सब इंसान हुन ख यूनान को राज्य को खिलाप भड़काएगो। 3 ओको बाद एक पराक्रमी राजा उठ ख अपनो राज्य बेजा बढ़ाएगो, अऊर अपनो मर्जी को हिसाब से ही काम कियो करेगो। 4 जब ऊ बड़ो होएगो, तब ओको राज्य टूटेगो अऊर चारी दिसा हुन म बट ख अगल अगल हो जाएगो; अऊर नी ते ओको राज्य को सक्ति ज्यो को त्यों रहेगो अऊर नी ओको खानदान ख कुछ मिलेगो; काहेकि ओको राज्य उखड़ ख, उन को बदला दुसरा अऊर इंसान हुन ख मिलेगो। 5 तब मिस्र देस को राजा बल पकड़ेगो पर ओको एक सासक ओ से जादा बल पकड़ ख हक करेगो; यहा लक कि ओको हक बडो हो जाएगी। 6 कुछ साल बितन को बाद मिस्र को राजा सिरिया को राजा से आपसी म संबंध जोडेगो, उन म रोटी बेटी को संबंध स्थापित करन को लाने दक्छिन देस को राजा अपनी पोरी को ब्याव उत्तर देस को राजा से करेगी, किन्तु वहा ओकी पोरी की सक्ति हमेसा बनी नी रहेगी। अऊर ओको खानदान ठीक नी पावन को ओकी पोरी की दासी हुन उन को नाती अऊर ओकी पोरी ख संकट को काल म सक्ती देवन वालो सब मऊत को घाट उतार दियो जायगो। 7 "फिर ओकी जड़ हुन म से एक डाल पैदा हो ख जगा म बढ़ेगी; ऊ सेना समेत सिरिया को राजा को गढ़ म आएँगो करेगो, अऊर उन से युद्ध कर ख प्रबल होएगो।" 8 तब ऊ उन को देवता हुन की ढली हुयो मूर्ती हुन, अऊर सोना-चाँदी को बहुमूल्य बर्तन हुन ख छुडा ख मिस्र म ले जाएगो; एको बाद ऊ कुछ साल लक सिरिया देस को राजा को खिलाफ अपना हात रोके रहेगो। 9 तब ऊ राजा मिस्र देस को राजा को देस म आएँगो, पर फिर अपनो देस म लोउट जाएगो। 10 सिरिया को राजा को पोरिया हुन लड़ाई को लाने एक बडी सेना तैयार करेगो, बाड़ को नद्दी को जसो आ ख देस को बीच हो ख जाएँगो, फिर लोउटते हुए ओको गढ़ लक झगड़ा मचाते जाएँगो। 11 तब मिस्र देस को राजा चिढ़ेगो, अऊर निकल ख उत्तर देस को ऊ राजा से युद्ध करेगो, अऊर ऊ राजा लड़न का लिए बड़ो भीड़ इकट्ठो करेगो, पर ऊ भीड़ ओको हात म कर दी जाएगो। 12 ऊ भीड़ ख जीत ख ओको मन फूल उठेगो, अऊर ऊ कई लाख सैनिक हुन ख मार गिराएगो, पर ऊ हमेसा जितो जितायो नी रहवन को। 13 काहेकि उत्तर देस को राजा लोउट ख पहले से भी बड़ो भीड़ इकट्ठो करेगो; अऊर कई दिन हुन कई साल हुन को बीतन प ऊ पक्को बड़ी विसाल सेना अऊर पुरो समान लियो हुओ आएँगो। 14 "ऊ दिन हुन म ढेर सारा इंसान मिस्र देस को राजा को खिलाप उठेगो; वरन् तोरो इंसान हुन म से भी उपद्रवी इंसान उठ खड़ा होएगो, जेसे यू दर्सन की बात पूरी हो जाएगी; पर वी ठोकर खा ख गिरेगो।" 15 तब सिरिया देस को राजा आ ख घेराबंदी करेगो अऊर पक्को सहर ले लेगो; अऊर मिस्र देस को नी ते प्रधान रयेगो अऊर नी बड़ा वीर, काहेकि कोई म खड़ो रहन को बल नी रहेगो। 16 तब जे भी उन को खिलाफ आएँगो, ऊ अपनो मर्जी पूरो करेगो, अऊर ऊ हात म सत्यानास लिए हुए सुन्दर देस म भी खड़ो होएगो अऊर ओको सामना करनवाला कोई नी रहेगो। 17 तब ऊ अपनो राज्य को पूरो तागत समेत, कई सीधा इंसान हुन ख संग लाने होए आने लगेगो, अऊर अपनो मर्जी को हिसाब से काम करयो करेगो। ऊ ओ ख एक बई ऐकोलाने देगो कि ओको राज्य बिगाड़यो जाए; पर ऊ रूकनो नी रयेगी, नी ऊ राजा को होएगी। 18 एको बाद ऊ समुंदर तट को राज्य हुन प चडाई करेगो, ऊ वहा को हर एक राज्य प सत्ता जमा लेगो, पर एक सेनापति ओको अहंकार ख खत्म कर देगो, वहा ओको अहंकार को अनुकुन ओ ख बदला देगो। 19 तब ऊ अपनो देस को गढ़ हुन को तरफ मुंडो फेरेगो, अऊर ऊ ठोकर खा कर गिरेगो, अऊर कही ओको पता नी रहेगो। 20 ओको बाद एक अऊर राजा आएँगो जे अपनी राज्य की दोऊलत बडावन को लाने इंसान हुन प वसुली लगा ख अत्याचार करन को लाने अधिकारी भेजेगो, कुछ ही बखत म राजा ख मार दियो जाएगो पर भीड़ म नी अऊर न ही युध्द म।
21 ओकी जगा म एक तुच्छ इंसान उठेगो, जेकी राज मान सम्मान पहिले तो नी होएगी, तेभी ऊ सुकुन को बखत आ ख चिकनी-चुपड़ी बात हुन को दुवारा राज्य ख प्राप्त करेगो। 22 तब ओकी भुजारूपी बाढ़ से लोग, वरन् वाचा का प्रधान भी, ओको सामने से बह ख नस्ट होएगो। 23 काहेकि ऊ ओको संग वाचा बाँधन पर भी कपट करेगो, अऊर थोड़ा ही इंसान हुन ख संग ले ख चढ़ ख सक्ति साली बन जाएगो। 24 सुकुन को बखत ऊ सिवाना को उत्तम से उत्तम जगा हुन प चढ़ई करेगो; अऊर जे काम न ओका पुरखा अऊर नी ओका पुरखा हुन को पुरखा हुन करत रा, ओ ख ऊ करेगो; अऊर लूटो वालो धन-दोलत उन म बेजा बाँटो करेगो। ऊ कुछ बखत लक पक्को सहर हुन को लेवन को विचार करते रहेगो। 25 तब ऊ मिस्र देस को राजा को खिलाफ बड़ी सेना ले ख अपनो तागत अऊर धीरज ख बढ़ाएगो, अऊर मिस्र देस को राजा बेजा बड़ी अऊर ताकतवार सेना ले ख युद्ध तो करेगो, पर नी ठैर सकेगो, काहेकि इंसान ओको खिलाप विचार करेगो। 26 ओको खाना को खावन वाला भी ओ ख हरवाएँगो; अऊर फिर भी ओकी सेना बाढ़ की जसी चढ़ेगो, तेभी ओका ढेर सारा इंसान मर मिटेगो। 27 तब उन दोई राजा हुन को मन बुरई करन म लगेगो, यहा लक कि ऊ एक ही मेज प बैठयो हुए आपसी म झूट बोलेगो, पर ये से कुछ बन नी पड़ेगो; काहेकि यी सब बात हुन को अंत कुछ ही बखत म होवनवालो है। 28 तब सीरिया देस को राजा बड़ो लूट ले ख अपनो देस ख लोउटेगो, अऊर ओको मन परमेस्वर को खिलाप होगो, अऊर ऊ अपनो मर्जी पूरो कर ख अपनो देस ख लोउट जाएगो। 29 नियत बखत प ऊ फिर मिस्र देस को तरफ जाएगो, पर ऊ पिछली बार को जसो यू बार ओको बस नी चलेगो। 30 काहेकि रोमन हुन को जहाज ओको खिलाप म आएँगो, अऊर ऊ उदास हो ख लोउटेगो, अऊर सुध्द वादा प चिढ़ ख अपनी मर्जी पूरो करेगो। ऊ लोउट ख सुध्द वादा को तोड़नवालो की सुधि लेगो। 31 तब ओका सैनिक हुन को दल खड़ा हो ख, मजबुत सुध्द मंदिर ख असुध्द करेगो, अऊर हमेसा होमबलि ख बंद करेगो। वी ऊ घृनित चिज ख खड़ो करेगो जे उजाड़ को वजे होवा है। 32 अऊर जे इंसान दुस्ट हो ख ऊ वादा ख तोड़ेगो, उन ख ऊ चिकनी-चुपड़ी बात हुन कह कह ख अविस्वासी को जसो बना देगो; पर जे इंसान अपनो परमेस्वर को अनुसरन करेगो वह ओको विरोध करेगो, वी धीरज बाँध ख बड़ो काम करेगो। 33 जे इंसान हुन को सिखावन वाला बुद्धिमान अगुवा बेजा इंसान हुन ख समझाएँगो, तेभी वी बेजा दिन लक तरवाल से मऊत को घाट उतार दियो जाएगो जलती हुई आगी म डाल देगो, अऊर बन्दीग्रह म डाल्यो जाएगो अऊर लुट की धन दोऊत ले लेगे अऊर वी बडो दुख म कई दिन पडे रहेगो, 34 जब वी सताव म मारे जाते जायगो तब उन ख कुछ मदद मिले तब वी थोडा बहुत सम्भालेगो, पर बेजा सारा इंसान चिकनी-चुपड़ी बात हुन कह कह ख उन म मिल जाएँगो; 35 ओ म से कुछ दिमाक वाले अगुवा हुन मार दियो जाएगो, एकोलाने होगा कि भरोसा म जाचियो जाए अऊर सुध्द करयो जाय। या दसा अंत को बखत लक बनी रहेगो, काहेकि यी सब बात हुन को अंत नियत बखत म होवनवालो है। 36 तब सीरिया को राजा अपनो मर्जी को हिसाब से काम करेगो, अऊर अपनो आप ख सारा देवता हुन से ऊँचो अऊर बड़ो ठैराएगो; वरन् सब देवता हुन को परमेस्वर को खिलाप भी अनोखी बात हुन कहेगो। जब लक परमेस्वर को घुस्सा सान्त नी हो जाए तब लक ऊ राजा को काम सफल होते रहेगो; काहेकि जे कुछ निस्चय कर ख ठानयो हुए है ऊ जरूर ही पूरो होवनवालो है। 37 ऊ अपनो पुरखा हुन को देवता हुन की चिंता नी करेगो, अऊर बाई हुन को भी देवता ख नी मानेगो, याहा लक पुरा देवता हुन ख भी अन देखा करेगो काहेकि वी सोचेगो की ऊ महान है। 38 ऊ अपनो राजपद प रूकी रय ख पक्को गढ़ हुन का ही देवता ख सम्मान करेगो, एक असो देवता को जे ख ओका पुरखा हुन भी नी जानत रा, ऊ सोना, चाँदी, मनि अऊर मनभावनी चिज हुन चढ़ा ख ओकी आराधना करेगो। 39 ऊ परायो देवता को सहारा ऊ अति पक्को गढ़ हुन से लड़ेगो, अऊर जे कोई ओ ख माने ओ ख ऊ बड़ो प्रतिस्ठा देगो। असो इंसान हुन ख ऊ ढेर हुन को ऊपर सासन करन वालो ठैराय देगो, अऊर इनाम को लाने अपनो देस की जमीन ख बाँट देगो। 40 अन्त को बखत मिस्र देस को राजा ओका सींग मारन लगगो; पर सीरिया देस को राजा ओ पर माटिया को जसो ढेर सारा रथ-सवार अऊर जहाज ले ख चढ़ई करेगो; यू रीति से ऊ ढेर सारा देस हुन म फैल जाएगो, अऊर उन म से आगु बढ़ जाएगो। 41 ऊ वादा को देस म भी आएँगो, अऊर बेजा सारा देस उजड़ जाएँगो, पर एदोमी, मोआबी अऊर खास खास अम्मोनी अऊर राज्य हुन ख देस ओको हात से बच जाएगो। 42 ऊ अपनी तागत ख कई देस हुन प बढ़ाएगो अऊर मिस्र देस भी नी बचेगो। 43 ऊ मिस्र को सोना चाँदी को खजाना हुन अऊर सब मनभावनी चिज हुन को मालिक हो जाएगो; अऊर लीबिया अऊर कूसी इंसान भी ओको पीछे हो लेगो। 44 वई बखत ऊ पूरब अऊर उत्तर दिसा हुन से खबर सुन ख घबराएगो, अऊर बड़ो घुस्सा म आ ख ढेर सारा हुन को सत्यानास करन को लाने निकलेगो। 45 ऊ दोई समुंदर हुन को बीच सुध्द सुन्दर पहाड को जोने अपनो राजकीय तम्बू खड़ो कराएगो; इत्तो करन पर भी मऊत आ जाएगो, अऊर कोई ओ को सहायक नी रहेगो।