21 काहे कि उ बखत असो भारी दुख होगो, जसो दुनिया ख सुरु से नी अब तक भयो अर नी कभी होगो। 22 अर उ दिन घटायो नी जातो ते कोई सरीर नी बचावत, पर चुनो भयो को कारन उ दिन घटायो दियो जाहे।"
21 काहे कि उ बखत असो भारी दुख होगो, जसो दुनिया ख सुरु से नी अब तक भयो अर नी कभी होगो। 22 अर उ दिन घटायो नी जातो ते कोई सरीर नी बचावत, पर चुनो भयो को कारन उ दिन घटायो दियो जाहे।"