44 एकोलाने तुम भी सावधान रह, काहे कि जो बखत को बारे म तुम विचार भी नी हैं, उ बखत इंसान को पोरिया आ जाहे।
44 एकोलाने तुम भी सावधान रह, काहे कि जो बखत को बारे म तुम विचार भी नी हैं, उ बखत इंसान को पोरिया आ जाहे।