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मत्ती 25

दस ुंउदहरन

1 "वरदस ुंजसअपनमसिलन करिकली। 2 25:2 ओमन ाँवकअर ाँसमझदहती। 3 अर वकअपनमसी, पर अपनिो; 4 परनसमझदअपनमसअपनभर िो। 5 जब आन भई, सब ऊगन लगअर गई"

6 "आधमची; िो, रह ैं! ओसकरन चलो।’ 7 तब सब ुंउठ अपनमसकरन लगी। 8 अर वकसमझ कहयो, अपनहम े, ि हममसरहैं।’ 9 पर समझदर कहयिो, कभहमअर ैं; अचैं ि चन नजअपनखरे।’ 10 जब खरदन 25:10 जा रहहतपहो, अर हती, ओखिघर चलगई अर दरविगयो।"

11 "एकसरुंआय कहन लगी, अरि, अरी, हमरवे!" 12 कहयिो, सच कहैं ूँ।

13 एकगतरह, ि िैं, बखत

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