बैरी हुन से प्रेम
43 "तुम न सुन चुको होए कि कहयो गयो रहा, अपनो पड़ोसी से प्रेम रखनो, अऊर अपनो बैरी से बैर।" 44 पर मी तुम से असो कहू हैं कि अपनो बैरी हुन से प्रेम रखनो अऊर जो तुम ख सतावा हैं उनको लाने बिनती करनो, 45 जसो तुम अपनो स्वर्ग म रहन वालो परमेस्वर बाप कि अवलाद ठहरोगो काहेकि उ भली अऊर बुरा दोई पर अपनो सूरज ख उगावा हैं, अऊर धर्मी अऊर अधर्मी दोई पर अपनो सूरज ख उगावा हैं। 46 काहेकि अदि तुम अपनो से प्रेम रखन वालो ही से प्रेम रखा हैं, ते तुमरो लाने का फायदा कि बात हैं? का कर लेन वालो भी असो नी करा? 47 "अदि तुम केवल अपना भई हुन ख ही नमस्कार करे, ते कोन सो बड़ो काम करा हैं? का गैर-यहूदी का भी असो नी करा हैं? 48 एकोलाने चाहूँ हैं कि तुम नेक बनो, जसो तुमारो स्वर्ग म रहन वालो परमेस्वर बाप सुध्द हैं।"