30 एकोलाने जब भी परमेस्वर म बररा कि घास ख जे आज हैं अर कल आगी म डाली जाहे, असो कपड़ा पहिना हैं, ते अरे कुछ दिन ख विस्वासी हुन, तुम का उ इत्ता बढ़ ख काहे नी पहिना हे?
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30 एकोलाने जब भी परमेस्वर म बररा कि घास ख जे आज हैं अर कल आगी म डाली जाहे, असो कपड़ा पहिना हैं, ते अरे कुछ दिन ख विस्वासी हुन, तुम का उ इत्ता बढ़ ख काहे नी पहिना हे?
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