घर बन्नो वाला दो अदमी हुसयार अर बेकुप
24 "एकोलाने जे कोई मोरी यी बात हुन सुन ख उन ख माना हैं," उ हुसयार अदमी को सामन रहे जेन अपनो घर टेकड़ा पर बनायो। 25 अऊर पानी बरसो, अर नद्दी म बाढ़ आई, अर धुंद फाफट चली, अर उ घर से टकराई, ते भी उ घर नी गिरो, काहेकि ओकी नीव पट्टान पर डाली गई हती।
26 "परन्तु जो कोई मोरी यी बात सुन हैं अऊर ओपर नी चला, उ मुर्ख को जसो रह जेन अपनो घर रेता पर बनायो 27 अऊर पानी बारिस अऊर नद्दी हुन म बाढ़ आई, अऊर हवा-तूफान चली, अऊर ओको घर से टकाराई। अऊर उ गिर ख अर सब बरबाद होय गयो।"