तीसरी ज़रूरत: संसार में मन न लगाना
12 बच्चों, यह सब मैं तुम्हें इसलिये लिख रहा हूं,
कि मसीह येशु के नाम के लिए तुम्हारे पाप क्षमा किए गए हैं.
13 तुम्हें, जो पिता हो,
मैं यह इसलिये लिख रहा हूं कि तुम उन्हें जानते हो, जो आदि से हैं.
तुम्हें, जो युवा हो,
इसलिये कि तुमने उस दुष्ट को हरा दिया है.
14 प्रभु में नए जन्मे शिशुओं,
तुम्हें इसलिये कि तुम पिता को जानते हो.
तुम्हें, जो पिता हो,
मैं इसलिये लिख रहा हूं कि तुम उन्हें जानते हो, जो आदि से हैं.
तुम्हें, जो नौजवान हो,
इसलिये कि तुम बलवंत हो,
तुममें परमेश्वर के शब्द का वास है,
और तुमने उस दुष्ट को हरा दिया है.
संसार से प्रेम मत करो
15 न तो संसार से प्रेम रखो और न ही सांसारिक वस्तुओं से. यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, उसमें पिता का प्रेम होता ही नहीं.