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हाग्गय 1

हविनरिआद

1 रयसनकिवरछठवें महपहलििअलतिएल यहियप़े, तथयहमहियहहवयह वचन गय भवियवकपहुंा:

2 सरवशकिहवयह कहनै: "कहतैं, हवभवन नरिसमय अभनहीं आयै.’ "

3 तब गय भवियवकहवयह वचन आया: 4 "यह समय ि पक्‍े, भवघरों ें रहो, और यह भवन उजपड़ा रहे?"

5 तब सरवशकिहवयह कहनै: "अपनलचलन पर वधवक ो. 6 मनबह, पर ें फसल ़ी िी. ो, िंकभनहीं भरता. ो, िंकभनहीं झती. कपड़े पहनतो, िंें उससगरनहीं िलती. मजदकमो, िंयह खरें पतनहीं चलता."

7 सरवशकिहवयह कहनै: "अपनलचलन पर वधवक ो. 8 ऊपर पह़ों ें और इमरतलकड़ी कर भवन बन, ि िऔर आदर ो," हवकहनै. 9 "मनबहफसल आशी, पर ़ा िा. और जब उसकर घर आए, ैंउसउड़ा िा. ों?" सरवशकिहवकहनै. "ोंि भवन उजपड़ा ै, और ममें हर एक अपने-अपनघर ें यसै. 10 इसलिे, रण आकओस और ि उपज करनिै. 11 ैंआदिि ों और पह़ों पर, अन, नयखमधु, और ि हर एक उपज पर, ों और घरपशपर, और सब हनत पर अकपड़े."

12 तब िअलतिएल ़े, यहमहियहू, और सब बचों हव, अपनपरमवर वचन और गय भवियवकलन िा, ोंि हवउनकपरमवर उसा. और ों हवभय ा.

13 तब हवशवहक गय ों हवयह िा: "ैं ूं," हवषणकरतैं. 14 तब हवयहियपिअलतिएल ़े, और यहमहियहतथबचों आतउभा. सब आयऔर सरवशकिहव, अपनपरमवर भवन िि, 15 और यह रयसनकछठवें महसवें ि.

रतिगई िभवयत

रयसनकसरवर,

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