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1 योहन 4:16-19

OHSS Hindi Contemporary Version

16 हमने अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम को जान लिया और उसमें विश्वास किया है.

परमेश्वर प्रेम हैं. वह, जो प्रेम में स्थिर है, परमेश्वर में बना रहता है तथा स्वयं परमेश्वर उसमें बना रहता हैं. 17 तब हमें न्याय के दिन के संदर्भ में निर्भयता प्राप्‍त हो जाती है क्योंकि संसार में हमारा स्वभाव मसीह के स्वभाव के समान हो गया है, परिणामस्वरूप हमारा आपसी प्रेम सिद्धता की स्थिति में पहुंच जाता है. 18 इस प्रेम में भय का कोई भाग नहीं होता क्योंकि सिद्ध प्रेम भय को निकाल फेंकता है. भय का संबंध दंड से है और उसने, जो भयभीत है प्रेम में यथार्थ सम्पन्‍नता प्राप्‍त नहीं की.

19 हम प्रेम इसलिये करते हैं कि पहले उन्होंने हमसे प्रेम किया है.

Em outras traduções

  1. HSB Hindi Standard Bible

    16 जो प्रेम परमेश्‍वर हमसे रखता है उसे हम जान गए हैं, और हमने उस पर विश्‍वास किया है।

    परमेश्‍वर प्रेम है, और जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्‍वर में बना रहता है और परमेश्‍वर उसमें बना रहता है। 17 इससे प्रेम हममें सिद्ध हुआ है ताकि न्याय के दिन हमें साहस हो, क्योंकि जैसे वह है वैसे ही इस जगत में हम भी हैं। 18 प्रेम में भय नहीं होता बल्कि सिद्ध प्रेम भय को दूर करता है। क्योंकि भय का संबंध दंड से है और जिसको भय है वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। 19 हम4:19 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "उससे" लिखा है। इसलिए प्रेम रखते हैं, क्योंकि उसने पहले हमसे प्रेम रखा।

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस पर विश्वास है। परमेश्वर प्रेम है; जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उसमें बना रहता है। 17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन साहस हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं। 18 प्रेम में भय नहीं होता4:18 प्रेम में भय नहीं होता: प्रेम एक मनोवेग नहीं हैं जो भय पैदा करता हैं, यदि मनुष्य को परमेश्वर के लिये सम्पूर्ण प्रेम हैं, तो उन्हें किसी भी बात का भय नहीं होगा।, वरन् सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय का सम्बंध दण्ड से होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। 19 हम इसलिए प्रेम करते हैं, क्योंकि पहले उसने हम से प्रेम किया।

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