16 जो प्रेम परमेश्वर हमसे रखता है उसे हम जान गए हैं, और हमने उस पर विश्वास किया है।
परमेश्वर प्रेम है, और जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्वर में बना रहता है और परमेश्वर उसमें बना रहता है। 17 इससे प्रेम हममें सिद्ध हुआ है ताकि न्याय के दिन हमें साहस हो, क्योंकि जैसे वह है वैसे ही इस जगत में हम भी हैं। 18 प्रेम में भय नहीं होता बल्कि सिद्ध प्रेम भय को दूर करता है। क्योंकि भय का संबंध दंड से है और जिसको भय है वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। 19 हम4:19 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "उससे" लिखा है। इसलिए प्रेम रखते हैं, क्योंकि उसने पहले हमसे प्रेम रखा।