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2 शमुएल 18

1 अपनिों िनती, और इसमें उनोंहज़ाों और कड़ों ऊपर रधबनि. 2 तब उनोंों ें ांटकर एक िआब ें, सरि़ेइयऔर आब अबें और सरिइततई ें िा. मनयह ििा, "ैं वयचलूंा."

3 मगर िों ििा, "नहीं, आपकहमसहनहीं ै. यदि हमें गनपड, उनें हमपरवनहीं ै. यदि हम आधिअबशिपरवनहीं करेंे. मगर आपकमहतहम दस हज़ाबरबर ै. तब इस िि ें यहि आप नगर ें रहतहमसमरथन करें."

4 यह उनें उततर िा, "ैं वहकरूंि ें सहै."

तब नगर टक खड़े गए और ौ-और हज़ासमसमों ें उनकिकलतचलगए. 5 आब, अबऔर इततई आदिा, "िरखतइस अबशदयिा." अबशिषय ें रधों िगए इस आदा.

6 तब यह इसएल करनें पहुंी, और यह एफईम वन ें िगया. 7 िों इसएल हरिा. उस िबहभयनक िसमें 20,000 िगये. 8 यह ें गया. तलवअपवन घनतअधिकतर िों ि.

9 गवश, अबशेंिों गई. उस समय अबशअपनखचचर पर चढ़ा ा. खचचर एक िलकांगनलगा. परिमसवर, अबशिांिों ें मजबा. उसकखचचर आगबढगयमगर वह वयि और आकलटकरह गया.

10 िअबशइस िि ें िऔर कर आब इसकचनी, "ि, ैंअबशांलटकै."

11 आब उस यकि कहा, "अचा! मनउससचमै? तब मनउसरकर ि पर ों ििा? इसकिैं ें दस ांि्‍और एक कमरबा."

12 मगर उस यकि आब उततर िा, "यदि पर हज़ाांि्‍रख िे, जकपर नहीं उठ सकता; ोंि वयहमनआपको, अबऔर इततई यह आदरखै, िरखतउस अबशरकिरखना.’ 13 इसकअलयदि ैंउसककर रति िसघिा, आप झसवयतरह अलग कर े, जबकि िनहीं रह सकता."

14 इस पर आब कहा, "यरसमय नषकरना." उनोंिऔर ांें लटकिअबशदय ें ोंि. 15 उसकदस िों े, आब हथिउठे, अबशरकर उस पर कर उसकर िा.

16 यह आब सम्‍ि रहूंी, और िइसएल करनआए, समपन आब आदा. 17 उनोंअबशशव वन ें एक गहरगडें लकर उसकऊपर पतथरों बहिलगिा. सभइसएलिगये, हर एक अपने-अपनें.

18 जब अबशिा, उसनमक पर अपनिएक रक बनविा. उसकिा, "रखनि, ोंि नहीं ै." इस रक उसनअपनिा. आज तक यह अबशरक ै.

अबशऔर

19 यह सब पर अहििा, "ैं कर यह ूंि हवउनें उनकशतमऱाै."

20 मगर आब उससकहा, "आज नहीं ओगे. िसरिा, िें आज ऐसनहीं करनि, ोंि यह जकसमै."

21 वहां 18:21 कूश नील नदी का ऊपरी क्षेत्र एक िा. आब आदिा, "मनै, उसकचनकर ो." शवककर आब अभिदन िऔर पड़ा.

22 अहआब िनती, "ो, उस िि."

आब उससा, ", ों रहो? इस समिकरनें रसिनहीं."

23 "ो," उसनउततर िा, "ैं ा."

तब आब उसउततर िा, "!" तब अहपड़ा और ें उस िआगिकल गया.

24 ों मधे. रहरचढकर पर बनछत पर पहुंगया. जब उसनि उसएक अकयकि नजर आया. 25 रहररतइसकचनी.

उससकहा, "यदि वह अकयकि उसकआनददयक एगा." वह यकि िकट-निकट आतगया.

26 तब रहरएक और यकि आता. रहररतरपििा, "ो, ो, एक और यकि अक़ा रहै!"

कहनलगा, "वह आनददयक रहै."

27 रहरउनें बता, "िरथम यकि ऐसलग रहि वह अहै."

यह कहा, "वह एक अचयकि ै. वह अवशरहै."

28 अहरकर कहा, "सब शल ै." तब वह समकि पर डवत गया, उसनआगकहा, "ैं हव, आपकपरमवर िोंमहशतपरिकर िै!"

29 उससा, "अबशसकशल ै?"

अहउततर िा, "जब आब आपकवक महिििा, तब ैंवहां बड़ी अवयवसी, मगर यह नहीं ि वह सब ा."

30 तब उसआदिा, "आकर यहां खड़े रहो." तब वह कर वहां खड़ा गया.

31 तब वह शववहां पहुंा. उसनचनी, "मह, िशखबरै! आज हवआपकििों पर जयिै."

32 यह ननशवरशिा, "अबशसकशल ?"

शवउततर िा, "महशतऔर उन सभियति, आपकि कटिबदैं, वहो, उस ै."

33 वनअभिनगर ऊपर बनककें कर करनलगे. जब वह वहां रहे, उनकउचगए शबगए, "अबश, , अबश! उततम यह ा, पर ी, अबश, !"

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