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2 Samuel 22

द-रचिआभ

1 जब हवउनकशततथऊल आकरमण बचिा, तब यह हवमना: 2 कहा:

"हवचट, गढऔर ़ाैं.

3 परमवर, िनमें ैं आसरूं, िचटैं.

वह और उदींैं.

वह गढ़, शरण और ़ाैं,

कषों रककरतैं.

4 "ैं हवूं, िवहि ैं,

और ैं शतटकूं.

5 लहरों ें िा;

पर िरहा.

6 अधउलझिा;

ैं आमने-मनगया.

7 "अपनदनें ैंहवी;

ैंअपनपरमवर ा.

अपनिें उनोंआवी,

उनकों ें पड़ा.

8 लकर ांपनलगी,

आकींथरथरउठी;

और ांपनलगी. ोंि वह े.

9 उनकनथों उठ रहा,

उनकआग चट करतरही,

उसनयलों दहकरखा.

10 उनोंआकशमडल ा, और उतर आए;

उनकों घनधका.

11 वह करपर चढकर उडगए;

वह हवों पर चढकर उडगये!

12 उनोंधकओढिा, वह उनकबन गया,

घने-वरें ि.

13 उनकमन

यलों ें आग जल गई.

14 वरहवगरजन ी,

और परम रधअपनशब.

15 उनों़े, और उनें िखरिा.

िजलिों उनकउखि.

16 हवरते,

नथों उनकांोंे,

गर जलमिलगे;

ें गई.

17 "उनोंवरबढ़ा िा;

रबल जल रवउनोंहर ििा.

18 उनोंरबल शतिा,

उनसे, िें झसी.

झसकहीं अधिशकिे.

19 कट िउनोंपर आकरमण कर िा,

िंसहयतहवें मगन ी.

20 वह पर आए;

झसअपनरसन्‍नतरण उनों़ाै.

21 "भलअनहवरतिफल िै;

ों वचछतअनउनोंईनिै.

22 ैं हविों लन करतरहूं;

ैंपरमवर िनहीं िै.

23 उनकियम मनबनरहे;

उनकियमों ैं कभिचलिनहीं .

24 ैं उनकमनिबनरहा.

झसरहा.

25 इसलिहवभलअनरतिफल िै,

उनकनजों ें धतअन.

26 "सचों रति आप वयिसयिैं,

ियकि पर आप वयिरकट करतैं,

27 वह, िमल ै, उस पर अपनिमलतरकट करतैं,

ियकि पर आप अपनचतरतरगट करतैं.

28 िनमयकि आप टकरदकरतैं,

मगर आपकि घमिों पर लगरहतै, ि कब उसि.

29 हव, आप पक ैं;

हवधकिमय कर ैं.

30 जब आप ओर ैं, ैं टककर सकतूं;

परमवर रण ैं तक ांसकतूं.

31 "यह वह परमवर ैं, िनकिां खरैं:

हववचन;

अपनसभशरणगतों िवह बन ैं.

32 ोंि हवअलपरमवर ै?

और हमपरमवर अलचटै?

33 वहपरमवर मजबआसरैं;

वह ियकि अपनपर चलैं.

34 उनीं ांों िरण ांों समबनिै;

ों पर वह रकैं.

35 वह ों षमतरदकरतैं;

ि अब ांें ांधनतक इसकर ैं.

36 आपनटकै;

आपकसहयतििपद िै.

37 ांों िआपऩा िै,

इसमें पगों ििसलन नहीं ै.

38 "ैंअपनशतकर उनें कर िै;

जब तक तरह गए, ैं टकर नहीं आया.

39 ैंउनें ऐसतरह चल ि

ि िउठसकें; ों ें िे.

40 शकि आपनिसशसबनिा;

आपनउनें, िउठ खड़े े, मनिा.

41 आपनशतिकर गनपर िवश कर िा, िे.

ैंउनें नषकर िा.

42 आशकरतरहे, मगर उनकरकिआया.

यहां तक ि उनोंहवी, मगर उनोंउनें उततर िा.

43 ैंउनें सकर ि समबनिा;

ैंउनें चल िा, ैंउनें गलचडसमौंा.

44 "आपनसजिों उठकलह टकिै;

आपनों पर सबसऊपर बनरखा;

अब कर रहैं, िनसैं तरह अपरििूं.

45 िमनकतआए;

उनें िषय ें रति आजगए.

46 ििों मनबल रहा;

ांपतअपनगढ़ों हर गए.

47 "िैं हव! धनैं चट!

टकचट, परमवर रतििों!

48 परमवर, िोंरतिफल िबदलिा,

और जनतअधकर िा,

49 शतकरतैं.

आपनशतऊपर िै;

आपनिंसक ों रकै.

50 इसलिे, हव, ैं ों मनआपकि करूंा;

आपकणगकरूंा.

51 "अपनिवहैं टका;

अपनअभििपर, और उनकशजों पर,

वह हमअपरकट करतरहतैं."

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