4 कौन है, प्रभु, जिसमें आपके प्रति श्रद्धा न होगी,
कौन है, जो आपकी महिमा न करेगा?
मात्र आप ही हैं पवित्र.
सभी राष्ट्र आकर
आपका धन्यवाद करेंगे,
क्योंकि आपके न्याय के कार्य प्रकट हो चुके हैं."15:4 स्तोत्र 111:2, 3; व्यव 32:4; येरे 10:7; स्तोत्र 86:9; 98:2