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प्रकाशन 18

वरगदपतन षण

1 इसकैंएक सरवरगदवरउतरता. वह बहमरा. उसकचमक उठी. 2 उसनशबें षणी:

" िगया! िगया! भवमहनगर िगया!’18:2 यशा 21:9

अब यह घर,

अशआतआशरय और,

हर एक अशपकबस

तथअशऔर िनवरों बसबन गई ै.

3 सब ों उसकलगन

खरस िै.

उसकै,

तथउसकिधन धनगए ैं."

परमवर रजअलग ि

4 तब एक अनशबवरिा:

" रजउस नगरहर िकल आओ ि ,18:4 येरे 51:45

उसकों ें उसकसहभबनि,

उसकिपतिां पर पड़ें.

5 उसकों वरतक पहुंै.

परमवर उसकअधरों िै.

6 उसनिउसककरो.

उसकअधरों अनउससबदलो.

उसनिें िरण िै,

उसें उसकििरण करो.

7 उसनितनअपनरशऔर उसनितनििै,

उसउतनतनऔर ़ा ो.

ोंि वह मन मन कहतै,

ैं समिजमूं,

ैं िधवनहीं ूं;

ैं कभिकरूंी.’18:7 यशा 47:7, 8

8 यहरण ि एक िें उस पर िपति पड़ेी:

मही, िऔर अक.

उसआग ें जलिएगा,

ोंि मरैं रभपरमवर, उसककरेंे.

पर िि

9 "तब ा, उसकें रहे, िोंउसकििा, उस ेंे, िसमें वह भसगई और उसकितथिकरेंे. 10 उसकतनकर डर खड़े कहेंे:

" भयनक! ितनभयनक! महनगरी,

मरमहनगर!

भर ें समय पहुंै!’

11 "उस पर िकरेंोंि उनकवसअब नहीं खरदता: 12 े, ांी, मतरत, ी, उततम मलमल, ैंगनतथशम, सब रकिलकड़ी तथी-ांवसं, मतलकड़ी वसं, ांे, तथगमरमर बनवसं, 13 लची, मसे, , , , खरस, ़ै, ा, ूं, पशधन, ़ें, ़े तथपहिहन; ों तथमनों खरददनहीं रहा.

14 "िफल मनइची, वह अब रहनहीं. ििऔर ऐशवरसभवसें कर चलगईं. अब ें कभिसकेंी. 15 इन वसी, उस नगररण धनवगए, अब उसकतनरण भयभखड़े और िकरतकहेंे:

16 " िै! िै! े, महनगरी,

उततम मलमल ैंगनतथवसरण करतऔर वर,

मतरतों तथिों दमकती!

17 षण ें उजडगयभव!

"हर एक जलयी, हर एक ि, हर एक तथहर एक, अपनिसमकमै, खड़ा रहा. 18 उसभसकरतउठे, कहीं इस भवमहनगरअननगर?19 अपनिपर , े-िे, िकरतकहनलगे:

" िै! िै, पर भवमहनगरी,

िसकपति रण सभजलय

धनगए!

अब भर ें उजगई ै!’

20 "आनिवर!

आनि, पवि!

ितथभवियदवका!

ोंि परमवर उस

ियवहिििै."

महनगर ििि

21 इसकएक बलववरगदिचकसमपतथर उठकर समें रचेंकतकहा:

"इसरकेंिएग

भवमहनगर ी,

िसककभअवशतक िा.

22 अब झमें यकों, ा, ांतथरही,

शबकभपड़ेा.

अब िगर ा,

झमें एगा.

अब झमें चकआव,

ी.

23 अब झमें एक

जगमगएगा,

अब झमें वर और वधा,

उल्‍लसिशबएगा,

सफल े.

सभों भरमिा.

24 झमें भवियदवकऔर पविों,

तथपर िगए सभयकिों लहगया."

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