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Resultados da busca por "esperança"

12 resultados encontrados

  1. Romanos 5

    हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि
    Capítulo 5
    Mostrando versículos 2–5 de 21

    2जिनके माध्यम से विश्वास के द्वारा हमारी पहुंच उस अनुग्रह में है, जिसमें हम अब स्थिर हैं. अब हम परमेश्वर की महिमा की आशा में आनंदित हैं.

    4धीरज में से खरा चरित्र तथा खरे चरित्र में से आशा उत्पन्‍न होती है

    5और आशा लज्जित कभी नहीं होने देती क्योंकि हमें दी हुई पवित्र आत्मा द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे हृदयों में उंडेल दिया गया है.

  2. Josué 15

    हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि
    Capítulo 15
    Mostrando versículos 42–52 de 63

    42लिबनाह, एतेर, आशान,

    50अनाब, एशतमोह, अनीम,

    52अरब, दूमाह, एशआन,

  3. 1 Samuel 30

    हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि
    Capítulo 30
    Mostrando versículo 30 de 31

    30जो होरमाह, बोर आशान, आथाक

  4. Lamentações 3

    हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि
    Capítulo 3
    Mostrando versículos 21–29 de 66

    21मेरी आशा मात्र इस स्मृति केआधार पर जीवित है:

    26उपयुक्त यही होता है कि हम धीरतापूर्वकयाहवेह द्वारा उद्धार की प्रतीक्षा करें.

    29वह अपना मुख धूलि पर ही रहने दे—आशा कभी मृत नहीं होती.

  5. Jó 17

    हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि
    Capítulo 17
    Mostrando versículos 1–15 de 16

    1मेरा मनोबल टूट चुका है,मेरे जीवन की ज्योति का अंत आ चुका है,कब्र को मेरी प्रतीक्षा है.

    11मेरे दिनों का तो अंत हो चुका है, मेरी योजनाएं चूर-चूर हो चुकी हैं.यही स्थिति है मेरे हृदय की अभिलाषाओं की.

    15तो मेरी आशा कहां है?किसे मेरी आशा का ध्यान है?

  6. Romanos 12

    हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि
    Capítulo 12
    Mostrando versículos 12–15 de 21

    12आशा में आनंद, क्लेशों में धीरज तथा प्रार्थना में नियमितता बनाए रखो;

    14अपने सतानेवालों के लिए तुम्हारे मुख से आशीष ही निकले—आशीष—न कि शाप;

    15जो आनंदित हैं, उनके साथ आनंद मनाओ तथा जो शोकित हैं, उनके साथ शोक;

  7. Provérbios 10

    हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि
    Capítulo 10
    Mostrando versículos 22–28 de 32

    22याहवेह की कृपादृष्टि समृद्धि का मर्म है.वह इस कृपादृष्टि में दुःख को नहीं मिलाता.

    27याहवेह के प्रति श्रद्धा से आयु बढ़ती जाती है,किंतु थोड़े होते हैं दुष्ट के आयु के वर्ष.

    28धर्मी की आशा में आनंद का उद्घाटन होता है,किंतु दुर्जन की आशा निराशा में बदल जाती है.

  8. Hebreus 6

    हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि
    Capítulo 6
    Mostrando versículos 11–19 de 20

    11हमारी यही इच्छा है कि तुममें से हर एक में ऐसा उत्साह प्रदर्शित हो कि अंत तक तुममें आशा का पूरा निश्चय स्पष्ट दिखाई दे.

    15इसलिये अब्राहाम धीरज रखकर प्रतीक्षा करते रहे तथा उन्हें वह प्राप्‍त हुआ, जिसकी प्रतिज्ञा की गई थी.

    19यही आशा हमारे प्राण का लंगर है, स्थिर तथा दृढ़. जो उस पर्दे के भीतर पहुंचता भी है,

  9. 1 Pedro 3

    हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि
    Capítulo 3
    Mostrando versículos 8–15 de 22

    8अंततः, तुम सब हृदय में मैत्री भाव बनाए रखो; सहानुभूति रखो; आपस में प्रेम रखो, करुणामय और नम्र बनो.

    11बुराई में रुचि लेना छोड़कर परोपकार करे;मेल-मिलाप का यत्न करे और इसी के लिए पीछा करे.

    15मसीह को अपने हृदय में प्रभु के रूप में सम्मान करो. तुम्हारे अंदर बसी हुई आशा के प्रति जिज्ञासु हर एक व्यक्ति को उत्तर देने के लिए हमेशा तैयार रहो

  10. 1 Coríntios 13

    हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि
    Capítulo 13
    Mostrando versículos 4–13 de 13

    4प्रेम धीरजवंत है, प्रेम कृपालु है. प्रेम जलन नहीं करता, अपनी बड़ाई नहीं करता, घमंड नहीं करता,

    7प्रेम हमेशा ही सुरक्षा प्रदान करता है, संदेह नहीं करता, हमेशा आशावान और हमेशा धीरज बनाए रहता है.

    13पर अब ये तीन: विश्वास, आशा और प्रेम ये तीनों स्थाई है किंतु इनमें सबसे ऊपर है प्रेम.

  11. Provérbios 13

    हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि
    Capítulo 13
    Mostrando versículos 9–19 de 25

    9धर्मी आनन्दायी प्रखर ज्योति समान हैं,जबकि दुष्ट बुझे हुए दीपक समान.

    12आशा की वस्तु उपलब्ध न होने पर हृदय खिन्‍न हो जाता है,किंतु अभिलाषा की पूर्ति जीवन वृक्ष प्रमाणित होती है.

    19अभिलाषा की पूर्ति प्राणों में मधुरता का संचार करती है,किंतु बुराई का परित्याग मूर्ख को अप्रिय लगता है.

  12. Romanos 8

    हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि
    Capítulo 8
    Mostrando versículos 19–25 de 39

    19सृष्टि बड़ी आशा भरी दृष्टि से परमेश्वर की संतान के प्रकट होने की प्रतीक्षा कर रही है.

    24हम इसी आशा में छुड़ाए गए हैं. जब आशा का विषय दृश्य हो जाता है तो आशा का अस्तित्व ही नहीं रह जाता. भला कोई उस वस्तु की आशा क्यों करेगा, जो सामने है?

    25यदि हमारी आशा का विषय वह है, जिसे हमने देखा नहीं है, तब हम धीरज से और अधिक आशा में उसकी प्रतीक्षा करते हैं.

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