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अय्योब 17

1 मनबल ै,

वन ि ै,

कबरतै.

2 इसमें नहीं, ठटकरनैं;

ि उनकभडों पर िै.

3 "परमवर, वह नत ि, आपकांै.

वह, िसका?

4 आपनउनकसमझ िकर रखै;

इसलिआप उनें जयवनहीं ेंे.

5 ें अपनिअपनिों गलकरतै,

उसकि रही.

6 "परमवर एक िंदनबनिै,

ैं अब वह ूं, िपर कतैं.

7 ि ै;

समसअब ा-समैं.

8 यह सब सजजन रह े;

तथििलकर ों िे.

9 िखरअपनिों पर अटल बनरहा,

तथे, सतयनिैं, बलवचले.

10 "िंआओ, सभआओ, एक िकर ो!

मधि्‍नहीं ा.

11 िों ै, जनर-चैं.

यहिि दय अभिी.

12 ि िें बदल ैं, कहतैं, रकिकट ै,’

जबकि धकें ैं.

13 यदि ैं घर िअधकरूं,

ैं धकें अपनिलगूं.

14 यदि ैं उस कबरकर कहूं,

जनक और ़ों ि बहिो,’

15 आशकहां ै?

िआशै?

16 यह अधें समएगी?

हम सभें िे?"

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