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Deuteronômio 11

आजिरतिफल

1 इसलिि हव, अपनपरमवर करऔर हमउनकिों, ियमों, अधों और आदों लन करो. 2 आज यह समझ ो: ैं ों ें नहीं करतूं, िोंहव, परमवर अनसन-शिषण समझै, उनोंइसउनोंहवमहनतो: उनकशकिो, उनकबढ़ाो; 3 उनकिगए ि, उनकिअद, उनोंिें िऔर िरजमनि; 4 ि, उसक़ों और रथों , जब करतचलरहे, हवउनें गर जल ें कर तरह कर ा. 5 और उनोंिजन रदें ा-िा, जब तक यहां पहुंगए, 6 और हवऔर अब, एलिऔर िे, िा, जब धरतअपनउनें, इसएल े, उनकघर-परिों ो, उनकििों और उनकरहहर एक वधबनिा. 7 मगर हविहर एक महगवो.

8 िआज हर एक आदलन करे, ि मजबऔर आगबढकर उस पर अधिकर सको, िकरनउस पर अधिकरनपर ो, 9 ि उस ें, िसमें और शहद बहयत ै, िउनें और उनकशजों शपथ हववजों ी, उमसको. 10 ोंि िअधिलकवहां रवकरनपर ो, वह िसमनहीं ै, जहां िकलकर यहां पहुंो, जहां और सबबगसमअपनों रयिंििकरते. 11 वसिपर अधिकरनउदउसमें रवकरनपर ो, वह पह़िों और िों ै, आकिजल जमकरतरहतै. 12 यह एक ऐसै, िसकखभहव, परमवर करतैं; इस पर हव, परमवर ि सदलगरहतै, कर तक.

13 यह तय ि यदि आज िरहइन आदों लन करे, अरहवअपनपरमवर करे, और उनीं अपनदय और अपनों करे, 14 वह उपयसम ें ि ििेंे, आतऔर िि, ि अपनअन्‍, नई खमधऔर अपनइकटकर सको. 15 वह पशिों ें उतपन्‍करतरहेंे. भरपकर ्‍ओगे.

16 यह रहि दय छल कर ि, ि परवतओर कर उनकऔर उपसनकरनलगो. 17 नहीं हवपर भडउठा. तब वह आकइस रकेंे, ि िअभें ि अपनउपज सकी; फलसवरहवउततम ओगे. 18 आददय ें रखे, अपनआतें उते; इनें अपनपर िें ांे, पर ोंे. 19 आदअपनिकरना. जब अपनघर ें ो, तब इनकउलकरे, जब ें आगबढरहऔर जब ििजब ींउठे. 20 उनें अपनघर खटों पर और अपनों पर िे, 21 ि उस ें, िरतिहवशपथपवक वजों ी, आकऔर बनरहनतक िनतें बढं.

22 ोंि यदि बड़ी सचआदों लन करतरहे, ैं ें लन करनआदरहूं—हव, अपनपरमवर करना, उनकिों लन करनऔर उनसतरह सचबनरहना. 23 तब हवइन सभों मनखदेंऔर ऐसों उनककर े, िनतें मसअधिऔर मसअधिशकिैं. 24 ऐसहर एक , िससांों तलवे, पति एगा. िजन रदकर लबतक और उस नदी, फरपशिगर11:24 पश्चिम सागर अर्थात् भूमध्य सागर तक. 25 यकि मनठहर सका. हवपरमवर, अपनरतिअन, उस पर, िे, भय, आतभर ेंे.

26 अब ो, आज ैं मनएक आशऔर एक रसकर रहूं— 27 आशउस िि ें, जब हव, परमवर आदों लन करे, िनकआदआज ैं ें रहूं; 28 और उस िि ें, जब हव, परमवर आदों करओगे, उस भटक ओगे, िसकआदैं आज ें रहूं, और उन परवतअनसरण कर े, िें नते. 29 और तब उस समय, जब हव, परमवर ें उस ें पहुंेंे, िपर अधिकरनिउसमें रवकरनपर ो, आशि़िपरवत पर और एबल परवत पर िकरे. 30 परवत यरदन नदैं, पशििें पर यह कनिों ै, अरें िलगमने, ांों िकट, िकरतैं. 31 ोंि अब इस यरदन नदकर उस पर अधिकरनपर ो, हवपरमवर ें रदकर रहैं. इस पर अधिकरकइसमें िकरनलगे. 32 आदऔर िैं आज मनपषकर रहूं, उनककरनें वधरहे.

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