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व्यवस्था 9

िजय

1 ो, इसएल: आज यरदन नदकरे, ि वहां, उन जनतहर करो, िनतें मसिऔर मसअधिशकिैं. उनकनगर और गढगगन मतैं. 2 लडें मसअधिऔर अनों ैं, इनें नतो, इनकिषय ें नतरहो: "ठहर सकतअनों मने?" 3 इसलिआज यह समझ ो, ि यह हवपरमवर ैं, भसकरनआग रण कर आगे-आगनदकर रहैं. वहमनउनें दबेंे, ि ं, ि उनें वहां खदकर कर ो; आदें हविगयै.

4 जब हवपरमवर उनें मनखदेंे, तब अपनमन ें यह ितक आना: "यह िकती, िसकरण हवइस पर अधिकरनषमतै." सच यह ि इन जनतटतरण हवउनें मनउनकि करतरहैं. 5 ें उन ों पर अधिइसलििनहीं रहा, ि धरमन ै; बलि इसलिि हव, परमवर उनें मनइसलििरहैं, ि ैं, ि हवउस रतिकरें, उनोंशपथ वज अब, िसहऔर ी. 6 इसलियह अचतरह समझ ि हव, परमवर अधिियह उततम इसलिनहीं रहि भलो, तव ें हठि ो.

बछड़े ि

7 यह सच कभि िजन रदें ितरह हव, परमवर िििकर इस तक पहुंचनतक िकरतरहो. हवििबनरहो. 8 यहां तक ी, परवत िकट मनहवऐसउकसिा, ि अपनें ें िे. 9 जब ैं उस परवत पर गया, जहां िऔर ठहररहा, ि पतथर पटिां ं; पटिां, िपर हववह गढी, उनोंांी; तब ैंवहां जन िऔर जल िा. 10 हववहां परमवर गलिपतथर पटिां ौंीं. उन पर वह ें गढ़ीं ीं, वहां इकटपर परवत पर आग हविा.

11 िों और ों पर हवपतथर पटिां ौंीं, पटिां. 12 तब हवआदिा, "अब ियहां करो, ोंि इन ों े, िें ििलकर ो, अशकर िै. ितनजलउस हट गए ैं, बतगया. उनोंअपनिएक ि ै."

13 हवपर रकट िा, "ैं इनकपहचगयूं. इसमें शक नहीं ि हठैं! 14 अब मत ो, ि ैं इनें करकपर उनकिूं. तब ैं मसएक ऐसउदभव करूंा, इनसअधिशकिऔर िनतें िा."

15 और ैं कर परवत उतर आए. ैं अपनों ें पटिां िा. 16 तब ैंि ि तव ें मनहवअपनपरमवर ििा! मनअपनिबछड़े एक ि रखी. बड़े उस भटक े, िहवबतगया. 17 ैंखते-खतउन पतथर पटिों ेंककर उनें र-चकर ा.

18 उन पहलिों और ों समैं हवमनपड़ा रहा; ैंजन िा, जल ; ोंि मनवह षण कर ा, हवि ें ा. इससमनहवभडा. 19 ैं हवअसऔर षण कलपनभयभगया, अब सरवनिआनपर ा; मगर इस अवसर पर हविनतपर िा. 20 अहरपर हवइतने, ि वह उसकर पर उतगए; तब ैंउसअवसर पर अहरििनती. 21 बनउस रत, उस बछड़े कर ैंउसआग ें जलिा, उसचल-कचल कर इतना, ि वह समगया. ैंयह उस नदें बही, उस परवत िकल रही.

22 ों हव, मसऔर िबरथ-हतआवह ें भडा.

23 जब श-बरनें हवें इस आदा, "उस पर अधिकर ो, ैं ें ूं." तब मनहव, अपनपरमवर आदििकर िा. मनउनमें ििऔर उनकआदपर िा. 24 ैंें ििऔर पहचै, हवरति िै.

25 तब ैं िऔर हवमनपड़ा रहा, ोंि हवअपनयह इचबते, ि वह ें कर ेंे. 26 ैंहवथनी, "रभहव, अपनरजि, आपकैं, िें आप अपनमहनत़ाै, िें आपनअपनसमरििै. 27 अपनवक अब, िसहऔर ि; इस रजहठ, और टतअनदकर ि. 28 नहीं ो, िआपनहमें िै, आपकमज़ाइस रककरेंहवइनें उस रतिें ें असमरगयऔर उसों गई ी, इसलिउसनिजन रदें उनककर िा.’ 29 िी, ैं आपकरजा; ां, आपक, िें आपनअपनअदमरऔर बढ़ािा."

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