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Deuteronômio 32

1 आकशमडल, यहां ो, समषण अवसर रदकरो;

खरिशबे.

2 िि-समटपके,

समषण मल पर लघूंों सम,

वनसपति पर ि सम

और ओस ूंों समपड़े.

3 ोंि षणहवसम;

हमपरमवर महनति करो!

4 वह चट! िउनकरचना,

ोंि उनकिां िैं;

िसयपरमवर, अनि,

यपऔर सतयनिैं वह.

5 हवरति उनकलन िरहै,

उनकरण उनकनहीं रह गए,

परअब ैं पतनऔर ि़ी!

6 ो, और मनदमति ो,

यहरतिफल रहहवो?

वह िनहीं, ें यहां तक आए ैं?

उनीं ि और उनीं रतिििगए ो?

7 अतउन िों मरण करो;

़िों ों िकरो.

अपनििचनकरो, वह ें अवगत करेंे,

रनि, और इसकउलकरेंे.

8 जब सरों ें उनकआविी,

जब उनोंआदम शजों वरिा,

उनोंों

इसएलिों िनतआधपर तब तय कर ीं.

9 ोंि हवपदउनकरजा;

उनकआवटन ै.

10 एक मरि ें उनकउससें, वस

वह ांय-सांकरतिजन ा.

उनोंउसकआस-पखड़ी कर ी,

वह उसकखभकरतरहे;

यहां तक ि उनोंउसकरकअपनतली-समी,

11 उस गऱ-सम, अपनिकर अपनबचों जगा,

उनकऊपर डररहतै,

वह अपनकर उनें उठै,

और अपनों पर ै.

12 िहवउसकिदरशक े;

हविपरकवतरत ी.

13 हवउसअपनों ें िचरण करनबनिा.

उसकउपयिि उपज उपलबी.

हवउसकिचटें मधपरी,

और वजचटें ी!

14 य-दध-दही,

़-बकरिों ,

और मनों और रजि ़ों,

और बकरों वसा,

इसकअलसरूं!

और मनहतरखमधवन िा.

15 मगर यश32:15 अर्थ: धर्मी; अर्थात् इस्राएल वसकर उदगया;

32:15 तुम कुछ पाण्डुलिपियों में वे ट-पऔर आकरषक गए े.

तब उसनअपनिकरपरमवर परिकर िा,

उसअपनउदचटगई.

16 िवतउनोंहवईरबनिा,

ििों उनोंहवउद्‍कर िा.

17 उनोंआतबलि अरिी, परमवर नहीं ी.

उन परकवतो, उनकिअजैं, नए वता,

िनकअसिें रकट ै,

िें वज नते.

18 मनउस चटउपी,

िसनें ा.

19 यह सब हवि ें गयऔर उनें उनसगई,

ोंि यह उतजनउनीं र-पिों गई ी.

20 तब हवकहा, "ैं उनसअपनिूंा,

ैं खनूंि ै, उनक;

ोंि ि़ी ैं;

ऐससनतति ैं, िसयैं नहीं.

21 उनोंउसकईरबनिा, ईशवर नहीं;

उनोंअपनिों उतििै.

तब अब ैं उनें उनकईरकरूंिें नहीं सकता;

एक ैं उनें िउकसा.

22 ोंि अगि रजवलिै,

वह अधिनतम तर तक रजवलिै.

उपज इसनभसकर ै,

और परवतों ींतक इसनवलिकर ै.

23 "उन पर ैं िपतिों लगूं

उन पर ैं अपनों रहकरूंा.

24 िरभे,

महउनें चट कर एगऔर बड़ा दयनउनकि;

ैं उन पर वनपशांरभकर ूंा,

ि ें ेंगतिी.

25 घर हर तलवििे;

घर तर भयोंे.

वक और वतिां,

िऔर .

26 ैं कह सकता, ैं उनें टकर कड़े-कड़े कर ूंा,

ैं मनों उनकि िूंा,

27 यदि शतओर उतजनभय ा,

ि उनकिगलत अनलगकर यह कहें,

िजय हमबल परिै;

इसमें हवनहीं ा.’ "

28 ोंि ऐसैं, िसमें ि िांअभै,

समझ नहीं उनमें.

29 यदि उनमें िमतयह समझ े,

उनें अपनतरा!

30 भलयह भव सकतै, ि िएक यकि एक सहसखदे,

और यकि दस सहसो,

यदि उनकउस चटअपनउनें ौंे,

और हवउनें उनकअधिा?

31 यह ि उनकचटहमचटनहीं ै,

यहां तक ि हमशततक यह नतैं.

32 उनकलतलत

और अम.

उनकिि ैं,

ुंकडैं.

33 ोंि उनकरस सरों िै,

ों तक हर.

34 "यह सब ें रहनहीं ै;

ें हर रकि?

35 रतििै; रतिदणैं ूंा.

वह अवसर आएगा, जब उनकिसली;

ोंि उनकिपदिवस आसन्‍ै,

और गति उन पर रहियति ी."

36 ोंि जब हवयह ेंि उनकरजशकि ै,

और अथववतरहै,

हवतब उनकवकों पर करें

और वह अपनरजरतिेंे.

37 हवरशकरेंे: "कहां ैं उनकवता;

वह चट, िसमें उनोंआशरय िा?

38 वता, उनकबलिों वसवन करतरहे,

और उनकेंखमधिा?

सहयतिसकिं!

आशरय-सथल!

39 "ि ैं हवूं,

अलनहीं ै—वतनहीं;

आदपर और वन रदैं ूं,

िगए ैं, और ैं भर ूं!

ऐसनहीं ै, ों सके.

40 ैं ूं, वरओर अपनबढ़ाकर यह कहतूं:

शपथ वन ी,

41 जब ैं अपनशतरतिूंा,

जब ैं अपनििों उसकरतिफल ूंा,

ैं अपनतलवपर लगउसचमक

और करा.

42 ैं अपनों रकमदमसकर ूंा,

तलवगयों

और िों रकांो,

शते-शवअधििों िों ी."

43 ों, हवरजउलमन,

ोंि वह अपनवकों हतरतिेंे;

अपनशतवह रतिेंे,

इससवह अपनऔर अपनरजियशिकर ेंे.

44 इसककर इसएलरजमनउनें इस रचनपठन िा; उनोंऔर उनकि(यहू) े. 45 जब इसएलिों मनसमगठन कर े, 46 उनोंइसएलिों आदिा, "इन शबों दय ें रख ो. ैं ें वनवरौंरहूं. अपनसनतति इनें वधवक लन करनआदे; इस ितरह लन करना. 47 ोंि यह िररथक वकतवनहीं ै. वसयहवन ै. इसमरउस ें अपनवन िों आवरधन करे, िसमें यरदन करकरवकरनपर ो, िसकअधिरहण करे."

परवत पर

48 उसिहवयह आदिा, 49 "अब अबिपरवत पर चढ, ़ो समआब ें ै. वहां कर कनपर िकरो, ैं अभिरहण िइसएल रदकर रहूं. 50 तब िपरवत पर चढ़ोे, वहीं अपनिसरिकर और अपनवजों ें समििा, िरकअहरपरवत पर अपनिसरििे, और वह अपनवजों ें समििगया. 51 ोंि मनसमसइसएलिों ें िह-कजल-सों पर ़ििजन रदें िसघिा, इसएलिों ें िउपयपविरतयवहनहीं िा. 52 उस दरशन कर सके; मगर उसमें रवनहीं करे, उस ें, ैं इसएलिों रदकर रहूं."

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