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उद्बोधक 1

4 एक ़ी खतऔर सरआतै,

मगर हमबनरहतै.

5 रज उगतै, रज बतै,

और ििअपनिकलनजगह पर पहुंउगतै.

6 दकिओर बहतहव

उततर िें कर ितर मतअपनें आतै.

7 ांि नदिां गर ें िैं,

मगर इससगर भर नहीं ा.

नदिां उसजगह पर बहनलगतैं,

जहां बह रहीं.

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