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इफ़ेसॉस 1

मसिजय

15 यहरण ि ैं रभमसें िऔर पविों रति िषय ें नकर, 16 अपनथनें ें करतपरमवर धनयवनहीं ा. 17 थनयह ि हमरभमसपरमवर और रतपमय िें रकशन आतरदकरें ि उनें उततम ि सको. 18 और ैं थनकरतूं ि अपनमन ों रकशन सकि उनकहट आशऔर उनकपविों भव धन ै, 19 और हम ििों रति उनकमरमहै. यह मरउनकमहशकि म-परणअन20 िउनोंमसें रकििा, जब उनोंउनें मरें िकर वरों ें अपनीं ओर ा, 21 सभसता, रधनता, मर, अधिऔर हर एक ऊपर, इस आने. 22 उनोंसब उनकअधकर ितथकलििसभवसिमणि ठहरि23 कलिा, उनकशर, उनकपरिणतै, सब ें सब भरकर करतैं.

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