22 पतन, अपन पत क अधन उस परकर रह, जस परभ क. 23 कयक पत उस परकर अपन पतन क सर ह, जस परकर मसह अपन दह कलसय क सर ह, जसक वह उदधरकरत भ ह. 24 जस परकर कलसय मसह क अधन ह, उस परकर पतन हर एक वषय म पत क अधन रह.
25 पत, अपन पतन स, उस परकर परम कर जस परकर मसह न कलसय स परम कय और सवय क उसक लए बलदन कर दय 26 क वह उस वचन क सनन क दवर पप स शदध कर अपन लए अलग कर, 27 क उस अपन लए ऐस तजसव कलसय बनकर पश कर जसम न कई कलक, न कई झरर, न ह इनक जस कई दष ह परत वह पवतर व नषकलक ह. 28 इस परकर, पत क लए उचत ह क वह अपन पतन स वस ह परम कर जस अपन शरर स करत ह. वह, ज अपन पतन स परम करत ह, सवय स परम करत. ह 29 कयक कई भ अपन शरर स घण नह करत परत सनहपरवक उसक पषण करत ह, जस परकर मसह कलसय क करत ह, 30 "कयक हम उनक शरर क अग ह. 31 इस करण परष अपन मत-पत क छडकर अपन पतन स मल रहग तथ व दन एक दह हग" 32 यह एक गहर भद ह और म यह मसह और कलसय क सदरभ म उपयग कर रह ह. 33 फर भ, तमम स हर एक अपन पतन स अपन समन परम कर और पतन अपन पत क सममन कर.