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ओबदयाह 1

ओबदयदरशन

1 ओबदिगयदरशन.

एदिषय ें परमवर हवयह ै,

हमनहवयह समै:

समसों िएक गया,

"उठो, हम िउस पर आकरमण करे."

2 "ो, ैं ें ों समकबनूंा;

अतिओगे.

3 दय अहें िै,

, चटिकलपर िकरत

और अपनघर पर बनो,

अपनआपसकहतो,

िसमें दम ै, ि पर सके?’

4 यदयपि गरसदइयों पर उडरहतो,

और अपनोंसलों मधें बनो,

ैं ें वहां आऊा,"

यह हवषणै.

5 यदि आएं,

यदि ि ें आएं,

उतनिकरें

ितनउनकिपर्‍ा?

यदि िकट आएं,

़ेंे?

6 पर एसटमी,

उसकिखजिगई!

7 समसिों ें तक खदेंे;

िकर ें अपनअधिें कर ेंे;

ैं, ििेंे,

पर ें इसकपतनहीं चला.

8 हवषणकर रहैं,

"ैं उस ि" एदिों ो,

एसपरवत ें समझदों नषकरूंा?

9 ा, , भयभोंे,

और एसपरवतों पर

हर एक मनिएगा.

10 मनपर ििंरण,

ें लजिपड़ेा;

और हमिओगे.

11 उस िखड़े सब खतरह

और ििों नगर ें रविा,

उसकपति टकर रह

और उनोंशलहडपनिमतपतों रयिा,

उनमें एक े.

12 अपनदशिों ें

उसकऊपर आनमत मना,

यहिरदििों पर,

उनकििें आनमना,

और उनककट िें

घमकरना.

13 रजकट िि ें

उनकनगर ें रवकरना,

उनकिपति ें

उनकखतरहना,

और उनकिपति अवसर पर

उनकपति पर कबकरना.

14 सडपर

उनकगनों लनिखड़े मत ा,

उनककट समय ें

उनकबच गयों शतों ें ौंपना.

15 "ों ि

ििहवििकट ै.

मनिै, िएगा;

िगए िपर पड़ेंे.

16 िरकमनपविपरवत पर वह िै,

उसरकितर वह रहेंे;

िऔर ि

और ऐसेंे, कभे.

17 िंबचकर िकल़िपरवत पर रहेंे;

वह पविा,

और शज अपनपति पर िअधिकरेंे.

18 आग सम

और समा;

एसबचूंसमा,

और उनें जलकर कर ेंे.

एसें

बचा."

ोंि यह हवकहै.

19 एसपरवत पर

ििों अधिएगा,

और िििपर

अधिकर ेंे.

एफईम तथशमरिों पर अधिकर ेंे,

और िििलआद पर अधिकरा.

20 इसएलिों यह दल, कनें

वह कनिों रफततक अपनअधिें कर ा;

शल, फहरथ नगर ें ैं,

नगरों अपनअधिें कर ेंे.

21 ़ाएसपरवत पर सन करनि

़िपरवत पर चढआऐे.

और हवएगा.

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