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Gênesis 41

वप

1 एक वपा: नदिखड़े ैं. 2 नदें ुंदर एवें िकलऔर चरनलगीं. 3 िऔर ें नदें िकलीं, तथपतलीं. नदिउन ों आकर खड़ी गईं. 4 और एवबल ों उन ुंदर एवों िा. इससींगई.

5 जब उनें िींआई, तब उनोंएक और वपा: एक तनें ें उगीं, अचऔर ीं. 6 िऔर ें उगीं पतलऔर रझीं, 7 तब पतलों ों िगल िा. इससींगई और वह समझ गयि यह वपा.

8 बह पर मन ें , इसलिइनकअरननििसब ििों एविों लवऔर उनें अपनों वपबतिउनकअरनहीं बता.

9 तब रधिकहा, "आज अपनगलतरहै. 10 एक अपनकरों और और रधनसगरकषकों यक घर ें ा. 11 हमनउस ें वपा, और ों वपअपनअलग अरा. 12 एक इबवक वहां ा, वह गरकषकों यक वक ा. जब हमनउसअपनवपबतउसनहमहर एक वपी. 13 उसनबत: अपनपद ौंिा, और नसें ण-दिा."

14 यह नकर कहि . उनोंजलहर िा. और उसककटकर उसककपड़े बदलकर कर आये.

15 कहा, "ैंएक वपै, उसकअरनहीं बतरहैं, िैंें ि वपअरबतसकतो."

16 यह नकर कहा, "अरैं नहीं, बलि वयपरमवर ेंे."

17 तब कहा, "ैंवपें ि ैं नदिखड़ा ूं. 18 वहां ैंएवुंदर ों नदिकलता. और चर रहीं. 19 तभैंि और ें िकलीं—बली, पतलऔर ीं. ऐसें ैंिें कभनहीं ीं. 20 बल एवों उन एवुंदर ों िा. 21 इतनपर यह समझ नहीं ि इनोंउन ों िा; िअब बनीं. और ींगई.

22 "ैंएक और वपा: एक तनें एवअचें उगीं. 23 तभैंि कमजऔर रझ, और लसें उगीं. 24 तथकमजों उन ों िगल िा. ैंअपनििों वपबते, िअरनहीं बता."

25 तब कहा, "आपकों वपएक ैं. इनमें परमवर बतैं ि परमवर करनरहैं. 26 ुंदर और ें वरैं, अचें वरैं; ों वपएक ैं. 27 कमजएवें, वरैं, और रझें वर; अकोंे.

28 "ैंबता, ा; परमवर आपकयह ििि जलै. 29 िें वरबहअचफसल ी, 30 और उसकवरअका. तब िउपज ेंे, और अका. 31 अकइतनभयनक ि अचफसल और उपज ितक नहीं रही. 32 आपनएक िषय वपे; यह इस िि परमवर िचय ऐसेंऔर परमवर जलइसकरेंे.

33 "इसलिजलिसमझदएवियकि िअधिबनं. 34 और िें सरषकों िकरऔर वरअचफसल और उपज ै, उस समय ि उपज चमांइकटकरें. 35 तब अचफसल वरों ें जन वसएकतिऔर अनअधिें नगरों ें रकिरखतें. 36 और यह जन वरअकबचनिििइकटकरि जन अभें नहीं मरें."

37 तथसब करमचिों लगि यह जवबदे. 38 अपनवकों ा, "हमें ऐसयकि िसकतिसमें परमवर आतो?"

39 िकहा, "इसलिि परमवर पर यह सब रकट िै, यह जवबदोंि समझदतथिनहीं. 40 और महल अधिोंतथरजआदलन करी. ैं िंसन पर ठनरण कर मसबड़ा रहूंा."

िअधि

41 और कहा, "ैंें िपर अधििै." 42 यह कहतअपनजमउतरकर पहनी, और मलमल वसतथगलें पहनी. 43 िअपनसररथ ें चढ़ाकर समिा. रथों आगे-आगचल रहअधिरहे, "टनो!" इस रकिअधिौंिा.

44 और कहा, "ैं ूं, िंअब िें िआजउठसकऔर ां." 45 नय़ाथ-पि41:45 ज़ाफेनाथ-पानियाह अर्थात्परमेश्वर बोलता है और जीवित है रखतथउनकिओन ििअसकर िा. इस रकअब समसिरशसक गए.

46 जब िगया, तब वरे. अधिकर समसििषण करनििकले. 47 पहलवरों ें बहउपज . 48 और इन वरों ें बहजन वसजमी, िें उतपन्‍रहीं. वह सब अन्‍नगरों ें जमकरतगए. िनगर उसकउपज वहीं जमकरतगए. 49 इस तरह गर तट समअनजमकर िि उसकिननिा, ोंि उपज असी.

50 इससपहलि अकवरों, ओन ििअस. 51 पहलमनश41:51 मनश्शेह अर्थात् भूल जाना रखोंि उनोंििा, "परमवर सभकषों एविपरिें सहयतै." 52 उनोंसरएफईम41:52 एफ्राईम अर्थात् फलवंत रखा, ोंि उनककहना, "ुःिलनजगह इस ें परमवर फलविा."

53 जब िें फसल वरखत, 54 तब अकवरों आत , कहा. सभों ें अका, िंिें अन्‍कमी. 55 जब िें जन कमलगतब जन ांगनलगे. िरजकहा, ". वह कहे, वहकरना."

56 जब ें अकपड़ा, तब अपनलकर िरविों अन्‍चनिा, ोंि अकभयनक ा. 57 अलग-अलग अन्‍खरदनआनलगे, ोंि पर अकभयकर ा.

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