मगदालावासी मरियम को मसीह येशु का दर्शन
11 परंतु मरियम कब्र की गुफ़ा के बाहर खड़ी रो रही थी. उन्होंने रोते-रोते झुककर कब्र की गुफ़ा के अंदर झांका. 12 उन्होंने देखा कि जिस स्थान पर मसीह येशु का शव रखा था, वहां सफ़ेद कपड़ों में दो स्वर्गदूत बैठे हैं—एक सिर के पास और दूसरा पैर के पास.
13 उन्होंने उनसे पूछा, "तुम क्यों रो रही हो?"
उन्होंने उत्तर दिया, "वे मेरे प्रभु को यहां से ले गए हैं और मैं नहीं जानती कि उन्होंने उन्हें कहां रखा है." 14 यह कहकर वह पीछे मुड़ीं तो मसीह येशु को खड़े देखा किंतु वह पहचान न सकीं कि वह मसीह येशु हैं.
15 मसीह येशु ने उनसे पूछा, "तुम क्यों रो रही हो? किसे खोज रही हो?"
उन्होंने उन्हें माली समझकर कहा, "यदि आप उन्हें यहां से उठा ले गए हैं तो मुझे बता दीजिए कि आपने उन्हें कहां रखा है कि मैं उन्हें ले जाऊं."
16 इस पर मसीह येशु बोले, "मरियम!"
अपना नाम सुन वह मुड़ीं और उन्हें इब्री भाषा में बुलाकर कहा "रब्बूनी!" (अर्थात् गुरुवर.)
17 मसीह येशु ने उनसे कहा, "मुझे पकड़े मत रहो, क्योंकि मैं अब तक पिता के पास ऊपर नहीं गया हूं, किंतु मेरे भाइयों को जाकर सूचित कर दो, ‘मैं अपने पिता और तुम्हारे पिता तथा अपने परमेश्वर और तुम्हारे परमेश्वर के पास ऊपर जा रहा हूं.’ "
18 मगदालावासी मरियम ने आकर शिष्यों के सामने घोषणा की: "मैंने प्रभु को देखा है." और उसने शिष्यों को वह सब बताया, जो प्रभु ने उससे कहा था.