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योहन 5

21 िरकिमरिकरकवन रदकरतैं, उसरकिहतै, वन रदकरतै. 22 ििनहीं करते, करनअधिउनोंौंिै. 23 िसससब आदर करें िकरतैं. वह यकि, आदर नहीं करता, िआदर नहीं करता, िोंै.

24 "ैं पर यह अटल सचरकट कर रहूं: वचन नतऔर जनें िकरतै, अनवन उसै; उसनहीं ठहरा, परवह कर वन ें रवकर ै. 25 ैं पर यह अटल सचरकट कर रहूं: वह समय रहपरगयै, जब तक परमवर आवेंऔर हर एक ननवन ्‍करा. 26 िरकिअपनआप ें वन रखतै, उसरकें बसवन ििगयवन ै. 27 मनरण उसकरनअधििगयै.

28 "यह सब नकर चकिोंि वह समय रहै, जब सभमरआवेंऔर िे. 29 करवन नरिऔर करनरि. 30 ैं वयअपनओर नहीं कर सकता. ैं उनसि्‍करतूं, िणय ूं. िणय सचोंि ैं अपनइचनहीं परअपनजनइचकरनिसमरिूं.

मसगव

31 "यदि ैं वयअपनिषय ें गवूं गवनहीं ी.

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