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योहन 7:14-18

OHSS Hindi Contemporary Version

उत्सव के समय मसीह येशु के प्रवचन

14 जब उत्सव के मध्य मसीह येशु मंदिर में जाकर शिक्षा देने लगे, 15 यहूदी अगुए चकित होकर कहने लगे, "यह व्यक्ति बिना पढ़े ज्ञानी कैसे बन गया?"

16 मसीह येशु ने उन्हें उत्तर दिया, "यह शिक्षा मेरी नहीं परंतु उनकी है, जिन्होंने मुझे भेजा है. 17 यदि कोई व्यक्ति उनकी इच्छा पूरी करने के लिए प्रण करे तो उसे यह मालूम हो जाएगा कि यह शिक्षा परमेश्वर की ओर से है या मेरी ओर से. 18 वह, जो अपने ही विचार प्रस्तुत करता है, अपना ही आदर चाहता है, परंतु वह, जो अपने भेजनेवाले का आदर चाहता है, वह बिलकुल सच्चा है और उसमें कोई छल नहीं.

Em outras traduções

  1. HSB Hindi Standard Bible

    14 अभी आधा पर्व ही बीता था कि यीशु मंदिर-परिसर में जाकर उपदेश देने लगा। 15 तब यहूदी चकित होकर कहने लगे, "बिना सीखे वह कैसे विद्या जानता है?" 16 इस पर यीशु ने उनसे कहा,"यह शिक्षा मेरी अपनी नहीं बल्कि मेरे भेजनेवाले की है। 17 यदि कोई परमेश्‍वर की इच्छा पर चलना चाहे, तो वह इस शिक्षा के विषय में जान जाएगा कि यह परमेश्‍वर की ओर से है या मैं अपनी ओर से बोलता हूँ। 18 जो अपनी ओर से बोलता है वह अपनी प्रशंसा चाहता है, परंतु जो अपने भेजनेवाले की प्रशंसा चाहता है वह सच्‍चा है, और उसमें कोई अधर्म नहीं।

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    14 और जब पर्व के आधे दिन बीत गए; तो यीशु मन्दिर में जाकर उपदेश करने लगा। 15 तब यहूदियों ने अचम्भा करके कहा, "इसे बिन पढ़े विद्या कैसे आ गई?" 16 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, "मेरा उपदेश मेरा नहीं, परन्तु मेरे भेजनेवाले का है। 17 यदि कोई उसकी इच्छा पर चलना चाहे7:17 यदि कोई उसकी इच्छा पर चलना चाहे: वस्तुतः यदि कोई मनुष्य इच्छा करता है या परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने के लिए तैयार है।, तो वह इस उपदेश के विषय में जान जाएगा कि वह परमेश्वर की ओर से है, या मैं अपनी ओर से कहता हूँ। 18 जो अपनी ओर से कुछ कहता है, वह अपनी ही बढ़ाई चाहता है; परन्तु जो अपने भेजनेवाले की बड़ाई चाहता है वही सच्चा है, और उसमें अधर्म नहीं।

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