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Lucas 8

रभऔर िों सहयिां

1 इसकरभपरमवर षणतथरचकरतनगर-नगर और ांव-गांिरनलगे. रहों िउनके. 2 इनकअतिििां उनककर रही, िें ों और टकिगया: मगदमरियम, िसमें िगए े, 3 ़ा पत्‍ा, ्‍तथअनिां. िां ी, अपनपति इनकसहयतकर रही.

4 जब नगर-नगर बड़ी इकटरहऔर रभरहे, रभउनें इस ांिी.

5 "एक िििकला. ें ििे, ों चलगए तथआकपकिों उनें िा. 6 पथरि पर पड़े, िपरनमरण रझगए. 7 ़िों ें पड़े और ़िों उनकबड़े उनें दबिा. 8 अचि पर िे, बड़े और फल ितनगयउससा."

जब रभयह ांउनोंशबें कहा, "िसकननों वह े."

9 उनकिों उनसरशिा, "इस ांअरै?" 10 रभउनें उततर िा, "ें परमवर ननषमतरदगई िंअनों िों रयकरनपडैं िससि,

" खतें;

और नतसमझें.’

11 "इस ांअरयह ै: परमवर वचन ै. 12 िि ैं, वचन नतैं िंआतऔर उनकमन वचन उठि िकरकउद्‍कर सकें 13 पथरि ैं, परमवर वचन ननपर रतैं िंउनमें जडरण िें ़े समय ििरह ैं. कठिपरिििों ें िरनपर िैं. 14 वह ि जहां ़िों मधिा, ैं, नतैं िंजब वनपथ पर आगबढैं, वन िंं, धन तथििउनकदमन कर ैं और मजबनहीं े. 15 इसकिपरउततम ि ैं, भलऔर िकपट दय वचन नतैं और उसढतवक रहतैं तथितर फल ैं.

पक ां

16 "पक जलकर उसबरतन ांकतऔर उसपलरखतपरउसवट पर रखति कमरें रवकरनपर सकें. 17 ऐसिनहीं िरकट िएगतथऐसरहसनहीं िउजगर कर मनएगा. 18 इसलिइसकिरखि नतो. ििै, उसऔर िएगतथििनहीं ै, उसकवह िएगा, उसकिउसकै."

रभतविपरिजन

19 तब रभऔर उनकउनसेंकरनवहां आए िंों रण उनकपहुंचनें असमररहे. 20 िरभचनी, "आपकतथहर खड़े ैं—आपसेंकरनरहैं."

21 रभकहा, "और ैं, परमवर वचन नततथउसकलन करतैं."

बवडर ांकरन

22 एक िरभिों कहा, "आओ, हम सरओर चलें." इसलिसब ें ठकर चल ि. 23 जब रहरभगए. उससमय पर रचबवडर उठा, यहां तक ि ें जल भरनलगऔर उनकवन खतरें पडगया.

24 िों कर रभजगकहा, "ी! ी! हम रहैं!" रभउठे.

और बवडर और लहरों ांा; बवडर थम गयतथलहरें ांगईं. 25 "कहां ि?" रभअपनिों रशिा.

भय और अचें एक सरछनलगे, "ैं यह, बवडर और लहरों तक आदैं और उनकआदों लन करतैं!"

अरों ुंें जन

26 इसकिरदें आए, गलसरओर ै. 27 जब रभतट पर उतरे, उनकेंएक ऐसयकि गई, िसमें अनसमे. ़ियकि उनकगया. यह यकि समय कपड़े पहनता. वह मकें नहीं परकबों ें रहता. 28 रभपर ि पडवह िउनकचरणों ें िऔर अतशबें िा, "ु! परम रधपरमवर ! और आपकएक सरा? आपसिनति आप कषें," 29 ोंि रभउस यकि ें िकल आजे. समय समय पर उस यकि पर रबल करततथउसांकलों और ़िों ें ांधकर पहरें रखते, िवह ़िां उसनसें ा.

30 रभउससरशिा, "ा?"

"िा," उसनउततर िोंि अनउसमें समे. 31 ा-गण रभितर िनतकर रहि वह उनें ें ें.

32 वहीं पह़ी पर अरों एक िसमचर रहा. रभिनति वह उनें अरों ें अनमति ें. रभउनें अनमति ी. 33 जब उस यकि ें हर आए, उनोंकर अरों ें रविऔर अर झपटकर ें े.

34 इन अरों चरवयह कर गए और नगर तथउस रदें सब जगह इस घटनिषय ें बतलगे. 35 वहां यह खनआनलगि ै. तब रभआए. वहां उनोंि वह यकि, पहल़िा, वसरण ि, तरह वसऔर सचरभचरणों ें ै. यह रह गए. 36 िोंयह सब ा, उनोंकर अनों ििि यह ़ियकि िरकै. 37 तब िरदतथों सभििों रभवहां चलकहोंि अतभयभगए े. इसलिरभवहां चलगए.

38 वह यकि िसमें िगयउसनरभिनति वह उसअपनें िंरभउसयह कहतििा, 39 "अपनपरिजनों ें तथइन बड़े-बड़े ों वरणन करो, परमवर ििैं." इसलिवह टकर सभनगर ें यह वरणन करनलगि रभउसकिबड़े-बड़े िैं.

और मरलडवनद

40 जब रभसरओर पहुंे, वहां तजकरतउनकगत िा. 41 इरमक एक यकि, यहसभरधा, उनसेंकरनआया. उसनरभचरणों पर िरकर उनसिनति वह उसकउसकघर 42 ोंि उसकएकमी, लगभग रह वरी, मरनपर ी.

जब रभवहां रहे, ें वह ें दबरहे. 43 वहां रह वरलहव-प़िएक ी. उसनअपनिों पर खरकर ी, पर वह िइलवसी. 44 इस आकर वस, और उसषण उसकलहबहनगया.

45 "िसनै?" रभा.

जब सभइससइनककर रहे, तरउनसकहा, "ी! यह बढआप पर िरहै."

46 िंरभउनसकहा, "िोंि यह पतचलि झमें मरिकलै."

47 जब उस यह समझ िि उसकरहनअसभव ै, भय ांपतमनआई और रभचरणों ें िपड़ी. उसनसभउपसिमनयह िि उसनरभों तथवह ततगई. 48 इस पर रभउससकहा, "ी! िें वसिै. परमवर ांि ें ."

49 जब रभयह कह रहे, यहसभरधइरघर ियकि आकर चनी, "आपकै, अब वर कषि."

50 यह रभइरिकर कहा, "डरमत! वल िकरऔर वह वसएगी."

51 जब इरघर पर पहुंे, रभतर, हन और तथकना-िअतििअनिअपनतर आनअनमति नहीं ी. 52 उस समय सभउस ििो-कर रकट कर रहे. "करयह ा-िा!" रभआजी, "उसकनहीं ै—वह िरहै."

53 इस पर रभपर सनलगोंि नति िै. 54 रभिपकडकर कहा, "ी, उठो!" 55 उसकउसमें आए और वह खड़ी गई. रभउनसकहि ििि. 56 उसका-िचकिरह गए िंरभउनें ििि ै, उसकचरिकरें.

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