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मार्कास 10

़ो नगर ें यकि

46 इसकमस़ो नगर आए. जब वह अपनिों तथएक ि़ो नगर िकलकर रहे, उनें िएक यकि, िरति, ांगतिा. 47 जब उसयह ि वह थवमसैं, वह रनलगा, "द-प, ु! पर ि!"

48 उनमें अनउसरनकनभरपिकरनलगे, िंवह और अधिरतगया, ", ु! पर ि!"

49 मसकर आजी, "उसयहां !"

तब उनोंउस यकि कर उससकहा, "उठो, आनमन! रभें रहैं." 50 यकि हरवसें, उछलकर खड़ा गयतथमसगया.

51 मसउससा, "हतझसे?"

"अपनों शनहतूं, रबी!" उततर िा.

52 मसउसआजी, ", यह िै, िसकवसगए ो." उसषण उस यकि ों शनआई और वह उनकचलनलगा.

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