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मत्तियाह 13

गलां

24 उनकमनएक अनांरसिा: "वरग-रलनउस यकि सकतै, िसनअपनें उततम पण िा. 25 जब उसकवक रहे, उसकशतआयऔर ूं मधगलकर चलगया. 26 जब ूं और ें आईतब गलिि.

27 "इस पर वकों आकर अपना, ी, आपनअपनें उततम े! िगलकहां गए?

28 "उततर िा, यह शतै.’

"तब वकों उससा, आप हतैं ि हम इनें उखेंें?’

29 "उस यकि उततर िा, नहीं, ऐसि गलउखूं उखो. 30 ूं तथगलों कटनतक बढो. उस समय ैं मजों आजूंा, गलइकटकर उनकिां ांि उनें जलििंूं खलिें इकटकर ो.’ "

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