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मत्तियाह 17

तरण

1 इस घटनितर, और उनकहन अनों अलग एक परवत पर गए. 2 वहां उनीं मनतरण गया. उनकहरसमअतचमकउठतथउनकवसरकसमउजजवल उठे. 3 उससमय उनें तथएलिें करतिि.

4 यह तरउठे, "रभु! हमयहां आनिषय ै! यदि आप कहें ैं यहां डप बनं—एक आपकि, एक ितथएक एलिि."

5 तरअभयह कह रहि एक उजलदल उन पर गयऔर उसमें एक शबिा, "यह ै—ि, िसमें ैं तरह ूं; इसकआजलन करो."

6 यह भय रण िि पर बल िपड़े. 7 उनकगए, उनें परिऔर उनसकहा, "उठो! डरमत!" 8 जब उठे, तब वहां उनें अलििा.

9 जब परवत उतर रहउनें कठआजी, "मनमरें िितक इस घटनवरणन िकरना."

10 िों रशिा, "ऐसों कहतैं ि पहलएलिआनअवशै?"

11 उततर िा, "एलिआएऔर सब ें12 िंसच यह ि एलिपहलै, और उनोंउनें पहचा. उनोंएलिमनमयवहिा. इसरकमनतनेंे." 13 इस पर िसमझ गए ि बपतिहन वरणन कर रहैं.

़िि

14 जब आए, एक यकि मनटनककर उनसिनतकरनलगा, 15 "रभु! पर ि. उसपडैं और वह बहकषें ै. वह कभआग ें िरतै, कभजल ें. 16 ैं उसआपकिों िंउसवसकर सके."

17 कह उठे, "अरअविऔर िगड़ी ़ी!" रभकहा, "ैं कब तक रहूंा, कब तक रज रखूंा? यहां अपनो!" 18 उस फटकऔर वह उस लक ें िकल गयऔर लक उसषण वसगया.

19 जब अकतब िउनकआए और उनसछनलगे, "रभु! हम उस ों नहीं िसके?"

20 "अपनिकमरण," उततर िा, "एक सच ैं पर रकट कर रहूं: यदि ममें एक िऔर इस परवत आजो, यहां हट ा!’ यह परवत यहां हट एगा—असभव ा. 21 [यह ि िथनऔर उपवहर नहीं िसकती.]17:21 कुछ प्राचीनतम मूल हस्तलेखों में यह पाया नहीं जाता"

ुःख-भऔर सरभवियव

22 जब गलरदें इकटरहे, उनसकहा, "अब मनमनों ों ें पकडिएगा. 23 उसकहतकर ेंे. सरिवह मरें ििएगा." िअतुःगए.

मछलुंें ि्‍िलन

24 जब कफरनहनगर पहुंे, तब उनोंे, ििििकर इकटकरते, तरआकर ा, "ििकर17:24 दो द्रह्मा की राशि नहीं े?"

25 "ां, वह ैं," तरउनें उततर िा.

घर ें रवकरततररशिा, "िमओन, यह बत, िससकर तथैं—अपनरजे?"

26 "रजे," तरउततर िा.

"अरकर ै." तरकहा; 27 "िी, ऐसि हमसं, ें , और अपनांें, पहलमछलपकडें आए उसकलना. वहां ें एक ि्‍ा. वहिउनें अपनतथओर कर-सवरा."

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