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मत्तियाह 14

जल सतह पर चलन

22 इसकिों ें सविइस उदिवश िि िउनकसरओर पहुंं, जबकि वह वयिकरनलगे. 23 िकरनवह अकपरवत पर चलगए ि वहां कर वह एकांें थनकरें. यह समय और वह वहां अके. 24 िपरिें हवतथलहरों थप़े कर तट बहिकल ी.

25 िरहर14:25 अंतिम प्रहर रात के करीब 3 बजे ें जल सतह पर चलतउनकओर आए. 26 उनें जल सतह पर चलतिघबरकर कहनलगे, "यह!" और भयभिलगे.

27 इस पर उनसकहा, "डरमत. हस रखो! ैं ूं!"

28 तरउनसकहा, "रभु! यदि आप ैं आजिि ैं जल पर चलतआपकं."

29 "आओ!" आजी.

तरउतरकर जल पर चलतओर बढलग30 िंजब उनकहवगति ओर गयवह भयभगए और जल ें बनलगे. वह ि, "रभु! बचइए!"

31 बढ़ाकर उनें िऔर कहा, "अरे, अलिी! मनों िा?"

32 तब ों ें चढगए और थम गई. 33 ें सविों यह कहतदनी, "सचमआप परमवर-पैं."

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