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मत्तियाह 17

़िि

14 जब आए, एक यकि मनटनककर उनसिनतकरनलगा, 15 "रभु! पर ि. उसपडैं और वह बहकषें ै. वह कभआग ें िरतै, कभजल ें. 16 ैं उसआपकिों िंउसवसकर सके."

17 कह उठे, "अरअविऔर िगड़ी ़ी!" रभकहा, "ैं कब तक रहूंा, कब तक रज रखूंा? यहां अपनो!" 18 उस फटकऔर वह उस लक ें िकल गयऔर लक उसषण वसगया.

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