पापिष्ठ विश्वासी के विषय में निर्देश
15 "यदि कोई सहविश्वासी तुम्हारे विरुद्ध18:15 कुछ प्राचीनतम पाण्डुलिपियों मूल हस्तलेखों में: "तुम्हारे विरुद्ध" शब्द पाए नहीं जाते. कोई अपराध करे तो जाकर उस पर उसका दोष प्रकट कर दो, किंतु यह मात्र तुम दोनों के मध्य ही हो. यदि वह तुम्हारी सुन ले तो तुमने उसे पुनः प्राप्त कर लिया.