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Mateus 21

िजय ें शलरव

1 जब शलनगर पहुंऔर ़ैपरवत पर थफमक पर आए, ों इस आजआगा, 2 "मनांें . वहां पहुंचतें एक गधिी. उसकउसकबचा. उनें लकर आओ. 3 यदि मसइस िषय ें रशकरउसयह उततर ा, रभइनकरत ै.’ वह यकि ें आजा."

4 यह घटनभवियवकगई इस भवियवि ी:

5 ़ि यह चनो:

रहै;

वह नमऔर वह गधपर ै,

ां, गधबच्‍पर, बच्‍पर.

6 िों आजतरह लन ि7 और गधऔर उसकबच्‍आए, उन पर अपनहरकपड़े ििऔर उन कपड़ो पर गए. 8 ें अधिांपर अपनहरकपड़े िि. अनों ़ों टहनिां टकर पर िीं. 9 आगे-आगतथे-आतलगरह

"्‍!"

"धनै, वह रभें रहैं."

"सबसें ्‍ा!"

10 जब शलनगर ें रविा, नगर ें हलचल मच गई. उनकआशचरिषय ा: "यह?"

11 उनें उततर रही, "यहैं वह भवियदवका—गलु."

सरर-यिि

12 िें रविऔर उन सभिहर ििा, वहां नदकर रहे. ों िां उलट ीं और कबतर चनों आसनों पलट िा. 13 उनें फटकरतकहा, "पविै: िथनघर कहलएगिंइसबनरहो." 7:11

14 िें ी, और गड़े आए और उनें वसिा. 15 जब रधिों तथिों ि अदिैं और बच्‍िें, "्‍ा" लगरहैं, अत.

16 और े, "रह, बच्‍लगरहैं?"

उनें उततर िा,

"ां, आपनपविें कभनहीं पढ़ा,

लकों और ि

आपनअपनिअपि रबिै?"

17 उनें कर नगर हर चलगए तथआरिथनिमक ांें ठहर गए.

फलहरझ

18 जब वह नगर ें टकर रहे, उनें लगी. 19 िएक खकर वह उसकगए िंउनें उसमें पतिों अलनहीं िा. इस पर उस िा, "अब झमें कभफल नहीं लगा." वह रझगया.

20 यह िरह गए. उनोंरशिा, "यह रझगया?"

21 उनें उततर िा, "इस सचसमझ ो: यदि ें िो—तनिो—वल वह करे, इस िगयपरयदि इस परवत आजे, उखडऔर समें ि!यह एगा. 22 थनें ििनतकरे, उस्‍करे."

अधि

23 िें रविऔर जब वह वहां िरहे, रधिऔर रनिउनकआए और उनसा, "िअधिसब कर रहो? वह, िसनें इसकअधििै?"

24 इसकउततर ें कहा, "ैं आपसएक रशकरूंा. यदि आप उसकउततर ेंैं आपकइस रशउततर ूंि ैं िअधियह सब करतूं: 25 हन बपतििसकओर ा—वरओर मनों ओर े?"

इस पर आपस ें िर-विमरकरनलगे, "यदि हम कहतैं, वरओर े,’ वह हमसकहा, तब आपनहन ें िों नहीं िा?’ 26 िंयदि हम कहतैं, मनों ओर े,’ तब हमें भय ै; ोंि सभहन भवियवकनतैं."

27 उनोंआकर कहा, "आपकरशउततर हमें नहीं."

उनें उततर िा, "ैं आपकनहीं बति ैं िअधिसब करतूं.

ों ां

28 "इस िषय ें िआपका? एक यकि े. उसनबड़े कहा, , आज कर ा.’

29 "उसनउततर िा, नहीं ा.’ परसमय उसपछतऔर वह चलगया.

30 "िसरगयऔर उससयहकहा. उसनउततर िा, ां, अवश.िंवह गयनहीं.

31 "यह बतइए ि िअपनिइची?"

उनोंउततर िा:

"बड़े े." उनसकहा, "सच यह ि समितथआप ों पहलपरमवर ें रवकर े. 32 बपतिहन आपकधरिआए, िंआप ों उनकििा. िंसमबहिों और उनकििा. यह सब खनपर आपनउनमें ििपशिा.

िों ां

33 "एक और ांि: एक हसा, िसनएक लगी, रदखड़ी ी, रसकुंबनतथमची. इसकवह िों पटपर कर पर चलगया. 34 जब उपज समय आया, तब उसनिों अपनि उनसउपज पहलतय िइकटकरें.

35 "िों उसकों पकड़ा, उनमें एक िी, एक हततथएक पथर. 36 अब हसपहलअधिें े. इन ों िों वहसब िा. 37 इस पर यह चकर ि समकरेंे, उस हसअपनिों ा.

38 "िंजब िों आपस ें ििा, ो! यह िै, चलो, इसकहतकर ें और पति हडें.’ 39 इसलिउनोंपकड़ा, उसहर गए और उसकहतकर ी.

40 "इसलियह बतइए, जब वहां आएगा, इन िों करा?"

41 उनोंउततर िा, "वह उन ों सरवनकर तथऐसिों पटपर ा, उससहसमय पर उपज ेंे."

42 उनसकहा, "आपनपविें कभनहीं पढ़ा:

" िपतथर जमििों अनपयिकर िा,

वहपतथर बन गया.

यह रभओर और यह हमि ें अनै’?

43 "इसलिैं आप सब पर यह सतरकिकर रहूं: परमवर आपसिएगतथउस ौंिएगा, उपयफल एगा. 44 वह, इस पतथर पर िा, कड़े-कड़े एगिंििपर यह पतथर िउसचलकर बना."

45 रधिऔर यह ांनकर यह समझ गए ि रभउन पर यह ांकहै. 46 इसलिउनोंपकडिी, िंउनें भय ा, ोंि भवियवकनते.

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